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मनोहारी नृत्याविष्कार से सजा कथक का ‘आवर्तन’

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– लयोम इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स की 15वीं वर्षगांठ पर हुआ आयोजन

पुणे। चेहरे की भावभंगिमाएं, घुंघरुओं की झंकार, लयबद्ध पदचालन और मोहक तालों के संगम से कथक का जादू पुणे में बिखरा। अवसर था वेदांति भागवत महाडिक द्वारा संचालित लयोम इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स एंड मीडिया की 15वीं वर्षगांठ का, जिसे कोथरूड स्थित यशवंतराव चव्हाण नाट्यगृह में ‘आवर्तन 2025’ के रूप में भव्यता से मनाया गया।

इस खास मौके पर गुरु पं. राजेंद्र गंगाणी की उपस्थिति में 170 कथक नृत्यांगनाओं ने एक साथ मंच पर कदमताल कर वातावरण मंत्रमुग्ध कर दिया। नन्हीं छात्राओं ने जब ‘मैत्री असावी अशी’ कविता पर अपनी कोमल और सधी हुई प्रस्तुति दी तो पूरा सभागृह तालियों से गूंज उठा।

वेदांति महाडिक और उनकी शिष्याओं ने ‘शिववंदना’, ‘गणेशवंदना’, धृपद, चतुरंग, त्रिवट तराना और तीनताल जैसे शास्त्रीय अंगों को जिस नजाकत से पेश किया, उसने पुणेकर रसिकों का दिल जीत लिया। संगीत संगत में अभिजीत पाटसकर (संवादिनी), सुनील अवचट (बांसुरी), मयूर महाजन और मुक्ता जोशी (गायन), यश सोमन (तबला) और अपूर्व द्रविड (पखवाज) ने कमाल की संगत दी।

‘आवर्तन’ में गुरु वंदना, गगन सदन, रसिले रंगीले, निज रे और दशावतार जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। वहीं वेदांति भागवत महाडिक और उनकी शिष्याओं ने शिववंदना, गणेशवंदना, धृपद, चतुरंग, त्रिवट तराना और तीनताल जैसी शास्त्रीय रचनाओं को जिस नजाकत से प्रस्तुत किया, उसने पुणेकर रसिकों का दिल जीत लिया।

संगीत संगत में अभिजीत पाटसकर (संवादिनी), सुनील अवचट (बांसुरी), मयूर महाजन और मुक्ता जोशी (गायन), यश सोमन (तबला) और अपूर्व द्रविड (पखवाज) ने कार्यक्रम को और भव्य बना दिया।

गुरु पं. राजेंद्र गंगाणी ने छात्राओं की मेहनत और प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा—“इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं का एक साथ मंच पर कथक की लय और भाव का समन्वय अद्वितीय है। लयोम इंस्टीट्यूट ने पुणे में कथक को नई ऊर्जा दी है। युवाओं का शास्त्रीय कला से जुड़ना भविष्य के लिए सुखद संकेत है।”

संस्था की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए वेदांति भागवत महाडिक ने बताया कि बीते 15 वर्षों में संस्था की चार छात्राओं को केंद्र सरकार की ‘सीसीआरटी’ छात्रवृत्ति मिली है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई पुरस्कार संस्था के छात्रों ने हासिल किए हैं। कार्यक्रम का संयोजन अक्षय महाडिक ने किया।

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