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मनपा वार्ड रचना में भाजपा का हस्तक्षेप, महाअघाड़ी जाएगी अदालत, पुणे का राजनीतिक माहौल गरमाया

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पुणे: “महापालिका चुनाव के लिए की गई वार्डबंदी (प्रभागरचना) में भारतीय जनता पार्टी ने सीधा हस्तक्षेप किया है। कई वार्डों की मनमानी तरीके से तोड़फोड़ की गई है और चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। इसके खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं और अब हम उच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल करेंगे,” यह आरोप कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के शहराध्यक्षों ने लगाया है।

कांग्रेस भवन, पुणे में आयोजित पत्रकार परिषद में कांग्रेस शहराध्यक्ष अरविंद शिंदे और एनसीपी (शरद पवार गुट) शहराध्यक्ष प्रशांत जगताप ने यह जानकारी दी। इस मौके पर विधायक बापू पठारे, अंकुश काकडे, गोपाल तिवारी, पूर्व विधायक दीप्ती चौधरी, अजीत डेरेकर, रविंद्र मालवदकर आदि उपस्थित थे।

शिंदे ने कहा कि “हमारा आरोप सही साबित हुआ है कि वार्डबंदी भाजपा के नेता ही कर रहे हैं। वार्ड नंबर 3, 6, 13 में नदी और हाइवे पार कर क्षेत्र जोड़े गए हैं। एक भाजपा नेता ने अपने वार्ड में पिछड़ा वर्ग का आरक्षण न आए, इसके लिए आयोग के सिद्धांतों को दरकिनार कर वार्डबंदी में पिछड़ा वर्ग के क्षेत्रों को तोड़ दिया है। खास समुदाय का प्रतिनिधि चुनकर न आए, इस तरह की वार्डबंदी भाजपा ने की है। इसलिए हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।”

जगताप ने कहा कि “वार्डबंदी करते समय छोटी-छोटी बस्तियां और सोसायटियों का भी विभाजन किया गया है। वडगांव शेरी को शेवालेवाड़ी और फुरसुंगी से जोड़ा गया है। समाविष्ट गांव और खराड़ी को एक वार्ड बना दिया गया है। कहीं 70 हजार तो कहीं 1.5 लाख मतदाता रखे गए हैं। कई वार्डों में चार पुलिस थानों और चार विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं आ रही हैं। पिछड़े वर्गों पर बड़ा अन्याय हुआ है। वारजे को शिवणे और उत्तमनगर से जोड़ने के बजाय खडकवासला से जोड़ा गया है। आपत्तियों के लिए जानबूझकर गणेशोत्सव का समय चुना गया है। इस तरह की वार्डबंदी से चुनाव बाद विकास कार्यों में भी बाधा आएगी। आठ सितंबर तक हम समान विचारधारा वाले दलों के साथ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगे।”

विधायक पठारे ने कहा कि “मार्गदर्शक सिद्धांतों का उल्लंघन कर यह वार्डबंदी की गई है। इसमें कहीं भी समानता नहीं है। जनता इसका जवाब देगी।”

दीप्ती चौधरी ने कहा कि “नक्शे देखने पर ही स्पष्ट होता है कि नियमों का पालन नहीं हुआ। विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ताधारियों ने भी समाज के साथ अन्याय किया है।”

अंकुश काकडे ने कहा कि “आपत्तियों और सुझावों पर क्या निर्णय होता है, यह देखेंगे; लेकिन अदालत जरूर जाएंगे।”

इस बीच, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गट) की बैठक अभी नहीं हुई है। लेकिन दावा किया गया कि पार्टी की भूमिका तय होने पर शिवसेना भी आपत्तियां दर्ज कराएगी।

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