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छात्रों को व्यावसायिक कौशल सीखना चाहिए – राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस

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एमआईटी डब्ल्यूपीयू का ७ वां दीक्षांत समारोहः ६८०० छात्रों प्रदान की उपाधियाँ

पुणे :  छात्रों को व्यावसायिक कौशल और मिशन और एक्शन के दो सिद्धांतों के आधार पर जीवन में आगे बढना चाहिए. नेल्सन मंडेला हमेशा कहते थे कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हथियार है. साथ ही शिक्षा सबसे अधिक संख्या में रोजगार प्रदान करती है. इसलिए छात्रों को अपनी डिग्री पूरी करने के बाद भी पढाई जारी रखनी चाहिए. यह विचार पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ.सी.वी. आनंद बोस ने व्यक्त किए.
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी का ७ वां. दीक्षांत समारोह शनिवार को विश्व सभा मंडप, विश्वराजबाग लोणी कालभोर में आयोजित किया गया. इस अवसर पर यूनविर्सिटी के ६८०० छात्रों को उपाधि प्रमाण पत्र प्रदान किए गए. इस अवसर पर वे बतौर मुख्य अतिथि के रुप में बोल रहे थे.
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की ओर से डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने विश्वधर्मी प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड को गव्हर्नर्स अवार्ड ऑफ एक्सलेन्स से नवाजा गया.
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सलाहकार और लेखक प्रो.डॉ. राम चरण बतौर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित थे. एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संस्थापक अध्यक्ष प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने समारोह की अध्यक्षता की. एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस, डॉ. सुनिता कराड, कुलसचिव प्रो.गणेश पोकले, सीईओ डॉ. प्रसाद खांडेकर, सीओओ डॉ. संतोष सोनावणे, और परीक्षा नियंत्रक डॉ. राहुल जोशी साथ ही यूनिवर्सिटी के डीन और निदेशक सभी उपस्थित थे.

समारोह में श्वेता राजश्री अय्यर को ‘फाउंडर प्रेसिडेंट मेडल’ और वेदांगी गुणेश पाटकर को ‘एक्झिक्युटिव्ह प्रेसिडेंट मेडल’ से सम्मानित किया गया. साथ ही ११४ छात्रों को स्वर्ण पदक, ९६ रजत पदक और ९६ कांस्य पदक ऐसे कुल ३०६ छात्रों को प्रदान किए गए. साथ ही ३७ छात्रों को पीएच.डी की उपाधि प्रदान की गई.
इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, कम्प्यूटर सायन्स अ‍ॅण्ड इंजीनियरिंग, रामचरण स्कूल ऑफ लिडरशीप बिझनेस,

 

ईकॉनॉमिक्स अ‍ॅण्ड कॉमर्स, स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, हेल्थ सायन्स एंड टेक्नोलॉजी, सायन्स एंड एनवोमेंटन्टल स्टडीज, डिजाइन, लिबरल ऑर्टस, लॉ तथा कॉन्शसनेस आदि विषयों के छात्रों को डिप्लोमा डिग्री और स्नातकोत्तर उपधियाँ प्रदान की गई.
प्रो.रामचरण ने कहा, जीवन में सफल होने के लिए प्रतिदिन मानसिक क्षमता बढाना, प्रतिदिन अध्ययन करना, लोगों के साथ काम करना सीखना, विश्वसनीय बनना और लोगोंं पर भरोसा करना सीखना, तथा सत्य एवं वादों को निभाना बहुत जरूनी है. असली यात्रा डिग्री प्राप्त करने के बाद शुरू होती है.
प्रो.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, भारतीय संस्कृति, परंपरा और दर्शन जीवन में शांति स्थापित करनेवाले सिद्धांत हैं. छात्रों को अनुशासन और प्रतिबद्धता का पालन करना चाहिए. साथ ही उन्हें अपने धर्म और अपने कर्तव्यों का ज्ञान होना चाहिए. भविष्य में सुख और शांति का मार्ग दिखाना भारत की जिम्मेदारी है.
डॉ.राहुल विश्वनाथ कराड ने कहा, यह यूनिवर्सिटी आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ विश्वस्तरीय ज्ञान प्रदान करके छात्रों को शिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य करता है. एक परिवर्तित भारत के लिए छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. साथ ही, शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से समाज की अधिकतम समस्याओं के समाधान पर अधिक बल दिया जा रहा है.
अजीत नायर ने कहा, पुणे विद्वानों का शहर है और वे विश्व में जाने जाते है. यदा दृष्टि और सृष्टि के अनुसार नवाचार ही राष्ट्र का निर्माण करता है. वर्तमान समय में चैट जीपीटी और अन्य एआई उपकरण दुनिया को बदल रहे है और समाज की संचार भाषा को बदल रहे है. साथ ही एमआई का उपयोग विश्व कल्याण के लिए और उसके विनाश के लिए भी किया जा सकता है. इसलिए इसका उपयोग सावधानी से किया जा सकता है. साथ ही यहाँ एआय में पीएचडी करने वालों को भी बधाई दी. कुलपति डॉ. आर.एम.चिटणीस ने प्रस्तावना रखी एवं स्वागत पर भाषण दिया. डॉ. प्रसाद खांडेकर ने छात्रों को शपथ दिलाई.
प्रो.डॉ. गौतम बापट ने कार्यक्रम का संचालन किया. डॉ. राहुल जोशी ने आभार माना.

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