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चुनाव आयोग चयन से न्यायपालिका को बाहर करने वाली सरकार, नैतिकता न सिखाए, न्यायपालिका के अनादर का आरोप लगाना बेमानी : कांग्रेस

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पुणे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल न होने को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा लगाए गए “न्यायपालिका और संविधान के अनादर” के आरोपों को कांग्रेस ने निराधार और हास्यास्पद बताया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाळदादा तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था “मुख्य चुनाव आयोग” की नियुक्ति प्रक्रिया से स्वयं न्यायपालिका को बाहर करने वाले सत्ताधारी अब न्यायपालिका के सम्मान पर भाषण दे रहे हैं, यह खुद में विरोधाभास है।

गोपाल तिवारी ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री, विपक्षी नेता और मुख्य न्यायाधीश की त्रिसदस्यीय चयन समिति में से मुख्य न्यायाधीश को हटाने और उनकी जगह गृहमंत्री अमित शाह को शामिल करने का निर्णय किसने लिया और क्यों लिया? इस पर भाजपा पहले जवाब दे, फिर राहुल गांधी पर टिप्पणी करे।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इससे पहले कई बार मुख्य न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल रहे हैं। इस बार संभवतः निजी कारणों से वे उपस्थित नहीं हो सके। उनकी अनुपस्थिति को आधार बनाकर राजनीतिक आरोप लगाना दुर्भावनापूर्ण है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की नियुक्ति संबंधी विधेयक को संसद में उचित चर्चा के बिना, विपक्ष के सैकड़ों सांसदों को निलंबित कर, जबरन पारित किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने अपने ही प्रभाव में काम कर चुके अधिकारी ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया, जिससे चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास दिखाई देता है। ऐसे में भाजपा को नैतिकता की बात करने का कोई अधिकार नहीं है।

तिवारी ने कहा कि संविधान ने न्यायपालिका को लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुमोटो कार्रवाई करने का अधिकार दिया है। भविष्य में इस संबंध में न्यायपालिका स्वयं पहल करे, ऐसी अपेक्षा है।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और संस्थाओं की गरिमा बचाने की उसकी लड़ाई जारी रहेगी।

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