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न्यायपालिका को दरकिनार कर चुनाव आयोग की मनमानी नियुक्ति – वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाल तिवारी

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पुणे , प्रतिनिधि . राज्य चुनाव आयोग की बार-बार हो रही चूकों पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा को कठघरे में खड़ा किया है। जब केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयोग की नियुक्ति में ही सरन्यायाधीश को बाहर कर, केंद्रीय मंत्री अमित शाह को शामिल कर मनमानी की, तो चुनावी अव्यवस्थाओं की नैतिक जिम्मेदारी भाजपा कैसे टाल सकती है? यह तीखा सवाल वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने सवाल उठाया है.

 गोपाल तिवारी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह द्वारा गठित समिति ने जानबूझकर ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त बनाया, जो पहले अमित शाह के अधीन गृह व सहकार विभाग में कार्यरत रहे हैं। उनके अनुसार, इसके बाद से आयोग द्वारा लिए गए कई निर्णय भाजपा-हितैषी दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने ने राज्य चुनाव आयोग के हालिया निर्णयों को अव्यवस्थित और संदिग्ध बताते हुए कई गंभीर प्रश्न उठाए, जिसमे
अपक्ष उम्मीदवारों को चिन्ह वितरण में लंबा विलंब जैसे मुद्दे है। इसलिए  चुनाव आयोग द्वारा मतदान 18 दिन आगे बढ़ाए जाने पर भी कांग्रेस ने कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने ने कहा, “क्या उम्मीदवारों का अतिरिक्त खर्च आयोग या सरकार वहन करेगी? देरी के पीछे क्या राजनीतिक लाभ खोजा गया?” उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अपनी ‘स्वायत्तता’ छोड़कर सत्ता पक्ष के इशारों पर काम कर रहा है और ‘दिशाहीन, असमंजसपूर्ण’ कार्यशैली का प्रदर्शन कर रहा है। आयोग इस दौरान “सत्ताधारियों से गुफ्तगू” कर रहा था, या उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा था।

राहुल गांधी ने उठाया था बोगस मतदारों का मुद्दा

वरिष्ठ प्रवक्ता गोपाल तिवारी ने कहा, कि वोट चोरी, बोगस व दुबार मतदारों की समस्या सबसे पहले राहुल गांधी ने उजागर की थी, और वर्तमान घटनाएँ वही आरोप सही साबित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र कांग्रेस ने इस संदर्भ में सबसे पहला निवेदन 30 तारीख की रात को चुनाव आयोग को भेजा था।

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