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“रूस के साथ भारत की मजबूत नींव कांग्रेस काल में, परंपराओं का अपमान कर रही है मोदी सरकार”

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मुंबई . रूस के साथ भारत के मजबूत और ऐतिहासिक संबंधों की नींव कांग्रेस शासनकाल में रखी गई थी, जिसकी उपेक्षा आज की सरकार कर रही है।यह आरोप महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान, जब अमेरिका ने पाकिस्तान को समर्थन देने के लिए बंगाल की खाड़ी में अपना विमानवाहक जहाज़ भेजा था, तब सोवियत रूस ने भारत का साथ दिया था। यह वही दौर था जब पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत की प्रगति, स्वावलंबन और प्रभावशाली विदेश नीति को विश्व मान्यता मिल रही थी।

उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की कूटनीति के कारण अगस्त 1971 में “भारत–सोवियत शांति, मैत्री और सहयोग संधि” संपन्न हो सकी थी, जो दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक नींव बनी।

 

तिवारी ने कहा कि चीन के दबावों के बीच भी रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया और सोवियत नौसेना ने अमेरिका के सातवें बेड़े को रोकने के लिए हिंद महासागर में अपना मोर्चा संभाला था।

 

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, भाजपा नेताओं ने पिछले वर्षों में अमेरिका-झुकाव वाली भूमिका अपनाई, जबकि कांग्रेस काल में भारत-रूस मैत्री संबंधों ने भारत को मज़बूती प्रदान की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रूस दौरे के समय दिया गया बयान — “2014 से पहले भारत निराशा और हताशा में था” — पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि यह देश का अपमान है और कांग्रेस शासन की उपलब्धियों को अनदेखा करने की प्रवृत्ति दर्शाता है।

 

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि संसदीय परंपराओं का उल्लंघन करते हुए राष्ट्रपति भवन में रूसी राष्ट्रपति के स्वागत समारोह में लोकसभा व राज्यसभा के विपक्ष के नेताओं को निमंत्रित नहीं किया गया। तिवारी ने कहा कि कांग्रेस शासन में यह प्रोटोकॉल हमेशा निभाया गया, और अटल बिहारी वाजपेयी, अरुण जेटली और सुषमा स्वराज जैसे नेता इन कार्यक्रमों में शामिल होते रहे थे।

अंत में, उन्होंने ने कहा कि मोदी–शाह की अहंकारी प्रवृत्ति और कांग्रेस के प्रति दुर्भावना के कारण लोकतांत्रिक परंपराओं को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है, जो चिंताजनक है।

 

 

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