पुणे : लोकमन्यनगर बचाव कृती समिति की ओर से लोकमन्य नगर के दत्त मंदिर चौक में नागरिकों ने अभूतपूर्व घंटानाद आंदोलन किया। थालियां, घंटे, काले झंडे और काले कपड़े पहनकर सैकड़ों नागरिक एकत्र हुए और पूरा दत्त मंदिर चौक जोरदार नारों से गूंज उठा। लोकमन्यनगर पुनर्विकास मुद्दे पर कई दिनों से बढ़ता असंतोष आज के आंदोलन में उभरकर समोर आया। “घर हमारा हक का है, किसी के बाप का नहीं!”, “सरकार का करना क्या—नीचे सिर, ऊपर पैर!”, “लोकमन्यनगर पर अन्याय अब बर्दाश्त नहीं!” ऐसे मजबूत नारों ने माहौल गर्म कर दिया।
महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और छात्रों—सभी समाजघटक ने बड़ी संख्या में उपस्थित राहकर प्रशासन के खिलाफ प्रखर नाराज़गी व्यक्त की। नागरिकों की मुख्य मांग थी कि उनका घर-कुल का हक सुरक्षित रहे और पुनर्विकास प्रक्रिया पारदर्शी तथा न्यायपूर्ण हो। आंदोलनकारियों का कहना था कि कई वर्षों से यहां रह रहे लोगों को आज पुनर्विकास के नाम पर अनिश्चितता में धकेला जा रहा है। घर, हक, मालिकाना अधिकार और भविष्य की सुरक्षा पर कोई ठोस गारंटी दिए बिना निर्णय थोपने की कोशिश की जा रही है, ऐसा आरोप उन्होंने किया।
लोकमन्यनगर बचाव कृती समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तुरंत संवाद शुरू कर सकारात्मक उपाय नहीं किए, तो आगे इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा। नागरिकों का गुस्सा और दृढ़ता देखकर यह मुद्दा और गंभीर होता दिखाई दे रहा है।
*“आगे और भी उग्र आंदोलन करेंगे” — एड. गणेश सातपुते*
“लोकमन्यनगर के नागरिकों को न्याय मिलने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। पुनर्विकास के नाम पर किसी के हक पर आघात होने नहीं देंगे। सरकार को तत्काल संवाद कर अपनी स्पष्ट भूमिका घोषित करनी चाहिए। नागरिकों का गुस्सा प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है। आवश्यकता पड़ी तो आने वाले समय में हम और भी उग्र आंदोलन का मार्ग अपनाएंगे।” ऐसा एड. गणेश सातपुते ने कहा।

