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सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षेत्र में अग्रणी बनने की महाराष्ट्र में क्षमता – VLSI सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सत्य गुप्ता

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पुणे: कंप्यूटर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक सभी तकनीकों के लिए अनिवार्य ‘सेमीकंडक्टर’ के उत्पादन में महाराष्ट्र देश का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है। इस दिशा में सभी स्तरों पर तैयारियां शुरू हैं, यह जानकारी ‘वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड’ (VLSI) सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. सत्य गुप्ता ने आज दी।

सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कार्य करने वाली VLSI सोसाइटी द्वारा ’39वीं VLSI डिज़ाइन अंतर्राष्ट्रीय परिषद 2026′ और ’25वीं अंतर्राष्ट्रीय एम्बेडेड सिस्टम परिषद’ का आयोजन पुणे में किया गया है। इस सम्मेलन में देशभर से 2,500 से अधिक प्रतिनिधि उपस्थित हैं और लगभग 550 छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया है। उद्घाटन सत्र के बाद डॉ. गुप्ता और सोसाइटी के पदाधिकारी शैलेश परब, रंजीत येवले और संजय घोरपडे ने पत्रकारों से संवाद किया।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में उपयोग की जाने वाली तकनीकों में सेमीकंडक्टर एक अनिवार्य घटक है। महाराष्ट्र में सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए कुशल जनशक्ति (Skilled Manpower), बुनियादी ढांचा और अन्य सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। इस क्षेत्र को गति देने के लिए उद्योग, शैक्षणिक संस्थान और सरकार को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है, और इस दिशा में सोसाइटी ने पहल की है।

केंद्र सरकार के साथ-साथ असम, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने सेमीकंडक्टर उत्पादन से संबंधित अपनी नीतियां (Policies) निश्चित कर ली हैं। महाराष्ट्र में इस नीति को अंतिम रूप देने का काम जारी है और सरकार से इस संबंध में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। डॉ. गुप्ता ने उल्लेख किया कि इस क्षेत्र के लिए महाराष्ट्र में सबसे अनुकूल वातावरण है।

मुख्य बिंदु:
रोजगार के अवसर: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ITI प्रशिक्षित तकनीशियनों से लेकर डिप्लोमा और डिग्री धारक इंजीनियरों तक सभी के लिए रोजगार के व्यापक अवसर हैं।

जागरूकता की कमी: हालांकि कई संस्थानों में अब सेमीकंडक्टर डिज़ाइन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, लेकिन अभी भी छात्रों और अभिभावकों के बीच इस उभरते क्षेत्र को लेकर पर्याप्त जानकारी नहीं है।

सॉफ्टवेयर से बेहतर अवसर: डॉ. गुप्ता ने कहा कि इस क्षेत्र में सॉफ्टवेयर क्षेत्र की तुलना में अधिक आकर्षक अवसर उपलब्ध हैं। इसके प्रति स्कूली स्तर से ही जागरूकता पैदा करना आवश्यक है।

भविष्य का लक्ष्य: सोसाइटी ने अगले 5 वर्षों में 50,000 प्रशिक्षित जनशक्ति तैयार करने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, छात्रों को स्वयं सेमीकंडक्टर बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को सोसाइटी की ओर से अनुदान (Grant) भी दिया जाएगा।

यह सम्मेलन, जिसमें विभिन्न कंपनियां और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं, 7 जनवरी तक चलेगा।

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