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‘एमआईटी एडीटी’ विश्वविद्यालय में शिवजयंती का उल्लासपूर्ण उत्सव

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पुणे : सनई-चौघड़ों की मधुर ध्वनि, तुतारी की गगनभेदी गर्जना, ढोल-ताशों का निनाद, भगवा पताकाएं और मर्दानी खेलों के साथ ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय!’, ‘जय भवानी, जय शिवराय!’ तथा ‘नमो पार्वती पतये, हर हर महादेव’ के जयघोष से एमआईटी आर्ट, डिज़ाइन एंड टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय में महाराष्ट्र के आराध्यदैवत छत्रपति शिवाजी महाराज की ३९६वीं जयंती अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई।

विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित शिवराय की अश्वारूढ़ प्रतिमा के समीप विश्वविद्यालय के कार्याध्यक्ष प्रो. डॉ. मंगेश कराड के करकमलों द्वारा हिंदवी स्वराज्य के प्रतीक भगवा ध्वज फहराकर जयंती उत्सव का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. किशोर राजे निंबाळकर, विश्वविद्यालय की कार्यकारी संचालक प्रो. डॉ. सुनीता कराड, कुलगुरू प्रो. डॉ. राजेश एस., प्रोवोस्ट डाॅ.सायली गणकर, प्रति-कुलगुरू डॉ. रामचंद्र पुजेरी, डॉ. मोहित दुबे, डॉ. नचिकेत ठाकुर तथा कुलसचिव डॉ. महेश चोपड़े सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर लोणी-काळभोर एवं कदमवाक वस्ती ग्रामपंचायत के नागरिकों, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, कर्मचारियों तथा सैकड़ों विद्यार्थियों के समक्ष विद्यार्थियों ने शिवराय पर आधारित कविताएं, पोवाड़े और पहाड़ी स्वर में शिवगर्जना प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक नृत्य तथा मैदानी खेलों के प्रदर्शन भी प्रस्तुत किए गए। शिवराय की पालखी के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई तथा अश्वारूढ़ प्रतिमा को क्रेन के माध्यम से पुष्पहार अर्पित कर महाराज की आरती की गई। इसके साथ ही कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो. डॉ. कराड ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ऊर्जा के महान स्रोत हैं। जीवन में कितनी भी बड़ी समस्याएं और संकट क्यों न आएं, शिवचरित्र का अध्ययन करने से उनका समाधान प्राप्त होता है। छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे भीतर ही विद्यमान हैं और उनके ३९६वें जन्मोत्सव का भाव प्रत्येक व्यक्ति के मन में विद्यमान है। अतः शिवछत्रपति के गुणों को आत्मसात करने का प्रयास करना ही सच्चे अर्थों में शिवजयंती मनाना है।

रक्तदान शिविर को उत्साहपूर्ण प्रतिसाद
शिवजयंती के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय में आयोजित रक्तदान शिविर तथा दुर्ग-निर्माण प्रतियोगिता को विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद प्राप्त हुआ। रक्तदान शिविर में १७० से अधिक दाताओं ने रक्तदान कर इस सामाजिक अभियान को सफल बनाया। विश्वविद्यालय की नवीन सूचना प्रौद्योगिकी इमारत के प्रवेश द्वार पर इन दोनों उपक्रमों का आयोजन किया गया था। विद्यार्थियों द्वारा रक्तदान जैसे सामाजिक उपक्रमों के माध्यम से शिवजयंती मनाए जाने पर स्थानीय नागरिकों ने उनकी सराहना की।

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