पुणे। राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रवक्ता एवं प्रवचनकार विकास लवांडे पर हुए शाईफेक हमले की महाराष्ट्र कांग्रेस ने तीव्र निंदा की है। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह हमला केवल विकास लवांडे पर नहीं, बल्कि छत्रपति शिवाजी महाराज, संत ज्ञानेश्वर और जगद्गुरु तुकाराम की सहिष्णु एवं संस्कारित परंपरा पर हमला है।
तिवारी ने कहा कि स्वयं को वारकरी बताने वाले हमलावर संग्राम भंडारे ने पहले भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोरात को धमकियां देकर अपनी झुंडशाही मानसिकता का परिचय दिया था। उस समय भी जनआंदोलन के माध्यम से ऐसे कृत्यों का विरोध किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की संत-वारकरी परंपरा को कमजोर करने वाली अतिवादी प्रवृत्तियों को वर्तमान में राजाश्रय मिलने से भंडारे, जगताप और राणे जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की सभ्य, सुसंस्कृत और सहिष्णु पहचान को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। संतों ने शारीरिक और मानसिक अत्याचार सहते हुए समाज में समानता और मानवता की नींव रखी। छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा फुले, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, आगरकर, महर्षि कर्वे और कर्मवीर भाऊराव पाटील जैसे समाजसुधारकों के योगदान से महाराष्ट्र प्रगतिशील और जागरूक बना है, लेकिन अब उसे प्रतिगामी दिशा में ले जाने का प्रयास हो रहा है।
गोपालदादा तिवारी ने कहा कि वारकरी संप्रदाय प्रेम, भक्ति, सहिष्णुता और समानता का संदेश देता है, लेकिन इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि कट्टर और हिंसक प्रवृत्तियां उसमें प्रवेश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वारकरी परंपरा को ऐसी अनिष्ट प्रवृत्तियों से मुक्त करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि संत ज्ञानेश्वर और तुकाराम को प्रताड़ित करने वाली फासीवादी मानसिकता आज सत्ता में दिखाई दे रही है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि महायुति में शामिल स्वयं को धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील बताने वाला अजित पवार गुट आखिर किन मजबूरियों में ऐसे घटनाक्रमों को सहन कर रहा है।
विकास लवांडे पर शाईफेक हमला संतों के महाराष्ट्र की सहिष्णु परंपरा पर हमला : कांग्रेस

