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मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस का निशाना

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पुणे  : मुख्य चुनाव आयुक्त एवं चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान न्यायालय द्वारा व्यक्त की गई आपत्तियों और टिप्पणियों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि “देश में संवैधानिक लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया की निर्भीक भूमिका अत्यंत आवश्यक है।”

गोपाल तिवारी ने जारी बयान में कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे। किंतु केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद मुख्य न्यायाधीश को समिति से हटाकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को शामिल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह संशोधन विधेयक संसद में भारी हंगामे और विपक्षी सांसदों के निलंबन के बीच पारित कराया गया। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, “चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता और स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए तिवारी ने कहा कि चुनाव आयोग को सत्ताधारी दल से स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कार्य करना चाहिए, ताकि जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।

सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “यह संतोष की बात है कि देश की सर्वोच्च न्यायपालिका अब भी संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और लंबे संघर्ष के बाद देश को लोकतंत्र और संविधान प्राप्त हुआ है। ऐसे में आने वाली पीढ़ियों के भविष्य, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। न्यायपालिका और मीडिया यदि निर्भीक एवं निष्पक्ष भूमिका निभाते हैं, तो यह देश और संविधान के प्रति उनकी निष्ठा का परिचायक है।

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