पुणे : ढोल-ताशों की गूंज, भगवा पताकाओं की शान और ‘छत्रपति शिवाजी महाराज की जय’, ‘जय भवानी, जय शिवराय, जय शंभूराजे’ तथा ‘हर हर महादेव’ के जयघोषों के बीच एमआईटी आर्ट, डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (एमआईटी एडीटी) में महाराष्ट्र के आराध्यदैवत छत्रपति संभाजी महाराज की 369वीं जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई।
विश्वविद्यालय के उर्मिलाताई कराड सभागार में प्रतिमा पूजन, शिव-शंभू गर्जना तथा विश्वविद्यालय के कार्याध्यक्ष प्रो. डॉ. मंगेश कराड के व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों के समक्ष स्वराज्य के धाकड़ छत्रपति संभाजी महाराज के कार्यों को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर प्र-कुलगुरु प्रो. डॉ. रामचंद्र पुजेरी, डॉ. मोहित दुबे, डॉ. नचिकेत ठाकूर, विद्यार्थी कल्याण विभाग के संचालक डॉ. सुराज भोयर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
इस दौरान शिवराय ढोल-ताशा पथक के सदस्यों का उनके योगदान के लिए सम्मान भी किया गया। व्याख्यान के बाद सभागार में ‘छावा’ फिल्म का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। फिल्म में छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन से जुड़े प्रसंगों को बड़े पर्दे पर देखकर विद्यार्थियों में उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला। फिल्म के अंतिम दृश्यों के दौरान सभागार का माहौल भावुक हो गया।
*संभाजी महाराज के कारण बचा महाराष्ट्र धर्म : डॉ. कराड*
प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने अपने संबोधन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ऊर्जा के महान स्रोत हैं। शिवाजी महाराज के बाद स्वराज्य पर आए संकटों का सामना छत्रपति संभाजी महाराज ने अत्यंत साहस के साथ किया। उन्होंने लगातार नौ वर्षों तक अनेक युद्ध लड़े और विजय प्राप्त की। उनके प्रखर प्रतिकार के कारण औरंगजेब की विशाल सेना भी कमजोर पड़ गई। इतिहास में संभाजी महाराज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हीं के कारण महाराष्ट्र धर्म सुरक्षित और सशक्त बना रहा।

