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“विदेशी निवेश कम होने से देश में आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति”

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पुणे : देश की ‘लगातार बदलती और अस्थिर विदेश नीति’, देश में फैलती अशांति और बिगड़ता सामाजिक सौहार्द, बढ़ता कट्टरपंथ और US के दबाव में भारत द्वारा लगातार समझौते की भूमिका अपनाने की वजह से देश को अमेरिका के गलत व्यापार सौदों और इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट पर बढ़ते टैरिफ को मानने पर मजबूर होना पड़ा है। जिसके कारण भारत को नुकसान उठाना पड़ रहा है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के सीनियर प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने दावा किया कि इस सारी अफरातफरी से तंग आकर, देश में विदेशी निवेशक पिछले कुछ महीनों (2026 में) से बड़े पैमाने पर भारत से निवेश वापस ले रहे हैं।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता Gopaldada Tiwari ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक स्थिति को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयात-निर्यात से जुड़े अमेरिकी ट्रेड डील और बढ़ते टैरिफ के दबाव में भारत को लगातार समझौते करने पड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन परिस्थितियों से परेशान होकर वर्ष 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारत से बड़े पैमाने पर निवेश वापस लेना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में Financial Times की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशी निवेशकों ने लगभग 1 करोड़ 80 लाख की विदेशी पूंजी भारत से बाहर निकाल ली है। तिवारी ने इस रिपोर्ट को “सत्य और वास्तविकता उजागर करने वाली निर्भीक पत्रकारिता” बताया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि केवल विदेशी निवेशक ही नहीं, बल्कि पिछले 2-3 वर्षों में कई भारतीय उद्योगपति और पूंजीपति भी देश छोड़कर विदेशों में बस रहे हैं और वहां की नागरिकता ले रहे हैं। उन्होंने इसे पिछले 75 वर्षों में देश के लिए सबसे शर्मनाक स्थिति बताया।

गोपालदादा तिवारी के अनुसार, इन घटनाओं का सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, विकास दर, रोजगार और महंगाई पर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार वास्तविक आर्थिक चुनौतियों से आंखें मूंद रही है, जबकि प्रधानमंत्री Narendra Modi विदेश दौरों और स्वागत समारोहों में व्यस्त हैं।

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