पुणे : अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और कॉर्पोरेट कंपनियों की ओर से बढ़ती असंतुलित प्रतिस्पर्धा के विरोध में All India Organisation of Chemists and Druggists (AIOCD) ने 20 मई 2026 को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है। संगठन के पुणे अध्यक्ष Sandeep Parakh ने पत्रकार परिषद में जानकारी देते हुए बताया कि देशभर के लगभग 12.50 लाख दवा विक्रेता इस बंद में भाग लेंगे। इस अवसर पर संगठन के पुणे सचिव अनिल बेलकर, कोषाध्यक्ष रोहित करपे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
संदीप पारख ने कहा कि दवा व्यवसाय देश में Drugs and Cosmetics Act 1940 और Rule 1945 के अंतर्गत नियंत्रित होता है, लेकिन ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर अब तक स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं बनाए गए हैं। इसके बावजूद देशभर में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन दवाओं की बिक्री जारी है।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है और न्यायालय ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश भी दिए हैं। बावजूद इसके सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है।
संगठन का कहना है कि कोरोना काल के दौरान सरकार ने दवाओं की होम डिलीवरी के लिए अस्थायी छूट दी थी, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद भी इसे वापस नहीं लिया गया। इसका फायदा उठाकर ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार पर कब्जा करने का प्रयास कर रही हैं।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि इससे छोटे और पारंपरिक दवा विक्रेताओं का अस्तित्व संकट में आ गया है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में दवा वितरण व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
AIOCD के प्रतिनिधियों ने बताया कि Drug Price Control Order (DPCO) 2013 के तहत दवा विक्रेताओं के लिए सीमित लाभ निर्धारित किया गया है, जबकि कॉर्पोरेट कंपनियां 20 से 50 प्रतिशत तक की छूट देकर बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं। संगठन ने यह भी मांग की कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं के वैकल्पिक ब्रांड देने का अधिकार दवा विक्रेताओं को दिया जाए।
संगठन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों को कई बार ज्ञापन देने के बावजूद कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। संगठन ने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र सहित पूरे देश में यह बंद पूरी तरह सफल रहेगा।

