पुणे : पुणे के श्री छत्रपति शिवाजी मार्केट यार्ड में लीची की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन इस वर्ष मौसम में आए बदलाव का असर लीची उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है। व्यापारियों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम के कारण बिहार में लीची की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे राज्य में लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हुआ है। फलों के व्यापारियों ने बताया कि देश में लीची की सबसे अधिक खेती बिहार और पश्चिम बंगाल में होती है। लीची का सीजन आमतौर पर मई के पहले सप्ताह से शुरू होकर मानसून आने तक चलता है। वर्तमान में पुणे के मार्केट यार्ड में बिहार और पश्चिम बंगाल से प्रतिदिन लगभग 3,000 से 3,500 पेटियों में लीची की आवक हो रही है। एक पेटी में करीब 9 किलो लीची होती है। मार्केट यार्ड के लीची व्यापारी राजेश परदेशी ने बताया कि ट्रक और हवाई मार्ग से लीची पुणे भेजी जाती है। ट्रक के माध्यम से आने वाली 9 किलो की एक पेटी का थोक मूल्य 1,400 से 2,600 रुपये के बीच है, जबकि हवाई मार्ग से आने वाली पेटियों की कीमत 2,000 से 2,600 रुपये तक पहुंच रही है।
उन्होंने बताया कि परिवहन लागत बढ़ने के कारण हवाई मार्ग से भेजी जाने वाली लीची की पेटियों के दाम में 500 से 600 रुपये तक की वृद्धि हुई है। हालांकि पश्चिम बंगाल से लीची की आवक बढ़ी है, लेकिन बिहार में उत्पादन में आई भारी गिरावट का असर बाजार पर दिखाई दे रहा है।
राजेश परदेशी के अनुसार, मौसम में लगातार बदलाव और असामान्य जलवायु परिस्थितियों के कारण बिहार की लीची फसल को इस वर्ष बड़ा नुकसान हुआ है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि बाजार में आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।

