पुणे, 8 जून : दिवंगत प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा और परिसर का सौंदर्यीकरण किसी निजी बिल्डर की पसंद के अनुसार नहीं, बल्कि सरकारी नियमावली और गजट के प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। यह मांग शास्त्री प्रतिमा समिति के निमंत्रक एवं पूर्व नगरसेवक गोपालदादा तिवारी ने पुणे महानगरपालिका प्रशासन के साथ हुई बैठक में उठाई। नवी पेठ स्थित 80 फीट शास्त्री रोड पर स्थापित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा परिसर में एक निजी डेवलपर द्वारा “आइलैंड सौंदर्यीकरण” के नाम पर तोड़फोड़ किए जाने की जानकारी स्थानीय शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) कार्यकर्ताओं को मिली थी। इसके विरोध में उन्होंने पुणे महानगरपालिका भवन के सामने आंदोलन शुरू किया। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए मनपा प्रशासन ने मुख्य अभियंता कार्यालय में चर्चा के लिए बैठक बुलाई।
सदाशिव पेठ के कार्यकर्ताओं को शास्त्री प्रतिमा की स्थापना का इतिहास ज्ञात होने के कारण उन्होंने यह मामला गोपालदादा तिवारी के संज्ञान में लाया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग आंदोलन करने के बजाय शिवसेना के आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया। साथ ही प्रतिमा समिति की ओर से मनपा आयुक्त को लिखित आपत्ति पत्र भी सौंपा गया।

तीन दिन तक चले आंदोलन के बाद मुख्य अभियंता कार्यालय में हुई बैठक में गोपालदादा तिवारी ने 12 मई 1989 को पुणे मनपा को शास्त्री प्रतिमा भेंट किए जाने के पुराने छायाचित्र और समाचार पत्रों की कतरनें प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय महापुरुषों और पूर्व प्रधानमंत्रियों की प्रतिमाओं एवं स्मारकों के संबंध में शासन की स्पष्ट नियमावली है, जिसके अनुसार प्रतिमा के चारों ओर खुला स्थान, सुरक्षा कठड़े तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं रखी जाती हैं।
बैठक में मुख्य अभियंता पावस्कर, उप अभियंता बिपिन शिंदे, शिवसेना के संजय मोरे, गजानन थरकुडे, गटनेता नितीन गावडे, प्रतिक आल्हाट, दत्ता घुले, अनंता घरत तथा कांग्रेस के सागर धाडवे, आशीष गुंजाल, नंदकुमार पापळ, शशांक पाटील, करुणा घाडगे और मनीषा फाटे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
गोपालदादा तिवारी ने बताया कि उनके तत्कालीन प्रभाग “नारायण पेठ से गांजवे चौक” क्षेत्र में शास्त्री रोड पर भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा स्थापित करने की भावना से स्थानीय क्रिकेट क्लबों, सामाजिक मंडलों और मित्रों के सहयोग से प्रसिद्ध शिल्पकार बी. आर. खेडकर से प्रतिमा बनवाई गई थी। यह प्रतिमा 12 मई 1989 को तत्कालीन महापौर एड. अंकुश काकडे और भावी महापौर बालासाहेब राऊत की उपस्थिति में पुणे महानगरपालिका को भेंट की गई थी।
इसके बाद मांगीर बाबा चौक स्थित गोलाकार आइलैंड में पुणे मनपा द्वारा सरकारी नियमों के अनुसार प्रतिमा स्थापित की गई तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री शरदचंद्र पवार के हाथों उसका अनावरण किया गया। तिवारी ने बताया कि बाद में लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र अनिल शास्त्री भी अपने परिवार के साथ इस स्मारक पर आए थे और उन्होंने कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए पुणे मनपा का आभार व्यक्त किया था।
उन्होंने कहा कि प्रतिमा समिति को बिना कोई पूर्व सूचना दिए, परियोजना का नक्शा या योजना दिखाए बिना ही तोड़फोड़ का कार्य शुरू कर दिया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय शिवसैनिकों ने राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना से आंदोलन शुरू कर इस विषय को प्रशासन के सामने लाया। इसके लिए गोपालदादा तिवारी ने सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन और आभार व्यक्त किया।
तिवारी ने कहा कि यह प्रतिमा ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा आते-जाते हैं। देश को “जय जवान, जय किसान” का प्रेरणादायी नारा देने वाले दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की यह प्रतिमा आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा, आत्मनिर्भरता और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती है।
दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा का सौंदर्यीकरण सरकारी नियमावली के अनुसार हो : गोपालदादा तिवारी
शिवसेना–कांग्रेस आंदोलन को मिली सफलता
पुणे, 8 जून। दिवंगत प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा और परिसर का सौंदर्यीकरण किसी निजी बिल्डर की पसंद के अनुसार नहीं, बल्कि सरकारी नियमावली और गजट के प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। यह मांग शास्त्री प्रतिमा समिति के निमंत्रक एवं पूर्व नगरसेवक गोपालदादा तिवारी ने पुणे महानगरपालिका प्रशासन के साथ हुई बैठक में उठाई।
नवी पेठ स्थित 80 फीट शास्त्री रोड पर स्थापित लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा परिसर में एक निजी डेवलपर द्वारा “आइलैंड सौंदर्यीकरण” के नाम पर तोड़फोड़ किए जाने की जानकारी स्थानीय शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) कार्यकर्ताओं को मिली थी। इसके विरोध में उन्होंने पुणे महानगरपालिका भवन के सामने आंदोलन शुरू किया। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए मनपा प्रशासन ने मुख्य अभियंता कार्यालय में चर्चा के लिए बैठक बुलाई।
सदाशिव पेठ के कार्यकर्ताओं को शास्त्री प्रतिमा की स्थापना का इतिहास ज्ञात होने के कारण उन्होंने यह मामला गोपालदादा तिवारी के संज्ञान में लाया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग आंदोलन करने के बजाय शिवसेना के आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया। साथ ही प्रतिमा समिति की ओर से मनपा आयुक्त को लिखित आपत्ति पत्र भी सौंपा गया।
तीन दिन तक चले आंदोलन के बाद मुख्य अभियंता कार्यालय में हुई बैठक में गोपालदादा तिवारी ने 12 मई 1989 को पुणे मनपा को शास्त्री प्रतिमा भेंट किए जाने के पुराने छायाचित्र और समाचार पत्रों की कतरनें प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय महापुरुषों और पूर्व प्रधानमंत्रियों की प्रतिमाओं एवं स्मारकों के संबंध में शासन की स्पष्ट नियमावली है, जिसके अनुसार प्रतिमा के चारों ओर खुला स्थान, सुरक्षा कठड़े तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं रखी जाती हैं।
बैठक में मुख्य अभियंता पावस्कर, उप अभियंता बिपिन शिंदे, शिवसेना के संजय मोरे, गजानन थरकुडे, गटनेता नितीन गावडे, प्रतिक आल्हाट, दत्ता घुले, अनंता घरत तथा कांग्रेस के सागर धाडवे, आशीष गुंजाल, नंदकुमार पापळ, शशांक पाटील, करुणा घाडगे और मनीषा फाटे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
गोपालदादा तिवारी ने बताया कि उनके तत्कालीन प्रभाग “नारायण पेठ से गांजवे चौक” क्षेत्र में शास्त्री रोड पर भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमा स्थापित करने की भावना से स्थानीय क्रिकेट क्लबों, सामाजिक मंडलों और मित्रों के सहयोग से प्रसिद्ध शिल्पकार बी. आर. खेडकर से प्रतिमा बनवाई गई थी। यह प्रतिमा 12 मई 1989 को तत्कालीन महापौर एड. अंकुश काकडे और भावी महापौर बालासाहेब राऊत की उपस्थिति में पुणे महानगरपालिका को भेंट की गई थी।
इसके बाद मांगीर बाबा चौक स्थित गोलाकार आइलैंड में पुणे मनपा द्वारा सरकारी नियमों के अनुसार प्रतिमा स्थापित की गई तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री शरदचंद्र पवार के हाथों उसका अनावरण किया गया। तिवारी ने बताया कि बाद में लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र अनिल शास्त्री भी अपने परिवार के साथ इस स्मारक पर आए थे और उन्होंने कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना करते हुए पुणे मनपा का आभार व्यक्त किया था।
उन्होंने कहा कि प्रतिमा समिति को बिना कोई पूर्व सूचना दिए, परियोजना का नक्शा या योजना दिखाए बिना ही तोड़फोड़ का कार्य शुरू कर दिया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय शिवसैनिकों ने राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी की भावना से आंदोलन शुरू कर इस विषय को प्रशासन के सामने लाया। इसके लिए गोपालदादा तिवारी ने सभी कार्यकर्ताओं का अभिनंदन और आभार व्यक्त किया।
तिवारी ने कहा कि यह प्रतिमा ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा आते-जाते हैं। देश को “जय जवान, जय किसान” का प्रेरणादायी नारा देने वाले दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की यह प्रतिमा आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा, आत्मनिर्भरता और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती है।