Jan Bharat Samachar

ग्रामीणों और पशुओं के लिए ‘दगडूशेठ’ का सेवा अभियान, 100 दिनों में पहुंचाया 1 करोड़ लीटर पानी

Spread the love

पुणे : भीषण गर्मी और सूखते जलस्रोतों के बीच प्यास से व्याकुल वन्यजीवों, पशुओं और ग्रामीणों के लिए श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट एवं सुवर्णयुग तरुण मंडल ने मानवता और जीवदया की मिसाल पेश की है। ट्रस्ट ने पुरंदर तहसील के दुर्गम वन क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों और वाडियों-बस्तियों में अपने दो टैंकरों के माध्यम से पिछले 100 दिनों में करीब 1 करोड़ लीटर पानी पहुंचाया है। वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर पानी का वितरण किया जा रहा है। यह सेवा अभियान ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील रासने, उपाध्यक्ष माणिक चव्हाण, कोषाध्यक्ष महेश सूर्यवंशी तथा सरचिटणीस एवं विधायक हेमंत रासने के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है।

ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील रासने ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए मानव के साथ-साथ वन्यजीवों का अस्तित्व भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी भावना से यह सेवा अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों द्वारा फसलों के लिए बचाकर रखा गया पानी पशुओं को देना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में ट्रस्ट की यह पहल उनकी चिंता को काफी हद तक कम कर रही है। वहीं चरवाहों को भी चारा और पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिली है।
ट्रस्ट द्वारा वर्ष 2014 से यह सेवा कार्य लगातार किया जा रहा है। गर्मी के मौसम में जलस्रोत सूख जाने के कारण वन्यजीव, पक्षी, पालतू पशु और ग्रामीणों को पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में ट्रस्ट की ओर से टैंकरों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में पानी पहुंचाकर राहत प्रदान की जाती है।

इस वर्ष भी पुरंदर तहसील के दक्षिण-पूर्वी दुष्काल प्रभावित क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या को देखते हुए वाल्हे, गायकवाडवाड़ी, मुकादमवाड़ी, अंबाजीचीवाड़ी, रणनवरेवाड़ी, चव्हाणवस्ती, पडळकरवस्ती, करेवस्ती, बहिर्जीचीवाड़ी, वारवडी, नारायणपुर, पूर-पोखर, दौंडज, नावली, कडेपठार देवस्थान, दरेवाड़ी तथा आसपास के अनेक क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मैदान और चतुर्मुख महादेव मंदिर परिसर के वृक्षों को भी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।

पानी पहुंचते ही प्यास से व्याकुल बकरियां, भेड़ें, गाय-बैल, दुधारू पशु और वन्यजीव जलाशयों की ओर दौड़ पड़ते हैं। कुछ ही पलों में सूखे तालाबों और जलकुंडों के आसपास जीवों की भीड़ दिखाई देने लगती है। यह दृश्य न केवल राहत का संदेश देता है, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भी उदाहरण बनता है।

Exit mobile version