पुणे : भारत के पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और सरकारी आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि देश की वास्तविक आर्थिक विकास दर 7.7 प्रतिशत नहीं, बल्कि लगभग 2.7 प्रतिशत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक आंकड़े वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते और इससे नीति निर्माण प्रभावित हो रहा है।
पुणे शहर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा पत्रकार भवन, नवी पेठ में आयोजित “आज की भारतीय अर्थव्यवस्था” विषयक विशेष परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि जब तक देश की सही आर्थिक तस्वीर सामने नहीं आएगी, तब तक प्रभावी आर्थिक नीतियां बनाना संभव नहीं होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने की। प्रारंभ में कांग्रेस की पश्चिम विभाग अध्यक्ष दीप्ती चौधरी ने यशवंत सिन्हा का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने बढ़ती महंगाई, ईंधन और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि तथा अमीर-गरीब के बीच बढ़ती आर्थिक असमानता पर चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर नीलिमा सिन्हा, पूर्व विधायक मोहन जोशी, पुणे मनपा कांग्रेस गुटनेता चंदूशेठ कदम, प्रवक्ता गोपाल तिवारी, सुनील शिंदे, दीपाली डोख सहित अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन प्रियंका जोशी ने किया।
आईएमएफ की ‘सी’ ग्रेड पर उठाए सवाल
यशवंत सिन्हा ने कहा कि नवंबर 2025 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक आंकड़े जुटाने की प्रणाली पर असंतोष जताते हुए देश को ‘सी’ ग्रेड दिया था। उनके अनुसार सरकारी आंकड़ों और वास्तविक आर्थिक स्थिति के बीच 4 से 5 प्रतिशत का अंतर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार काम से अधिक प्रचार पर ध्यान दे रही है और जनता तक सही जानकारी नहीं पहुंचने दे रही।
नोटबंदी, निवेश और रोजगार पर सरकार को घेरा
सिन्हा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में घरेलू बचत और निवेश जीडीपी के लगभग 33 प्रतिशत पर स्थिर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य वर्तमान आर्थिक नीतियों के साथ संभव नहीं है। उनके अनुसार इसके लिए लगातार कम से कम 8 प्रतिशत की विकास दर आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कारण रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
नोटबंदी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इसके घोषित उद्देश्यों में से कोई भी पूरा नहीं हुआ। बाजार में मौजूद लगभग पूरा नकद बैंकिंग प्रणाली में वापस लौट आया और काले धन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले दो वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट आई है, जबकि भारतीय नागरिक विदेशों में अधिक निवेश कर रहे हैं।
कृषि और विदेश नीति पर भी जताई चिंता
सिन्हा ने कहा कि एल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर रहने की आशंका है, जिससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका द्वारा भारतीयों पर लगाए गए अतिरिक्त कर के खिलाफ भारत ने विश्व व्यापार संगठन में कोई प्रभावी शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसके अलावा उन्होंने ‘एपस्टीन फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि यह पूरी तरह सार्वजनिक हुईं तो भारतीय राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है।

