पुणे। अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण का निर्णय राष्ट्रीय जातीय जनगणना पूरी होने के बाद ही लिया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक समाज को उसकी वास्तविक जनसंख्या के अनुपात में न्याय मिल सके। यह मांग पुणे के उपमहापौर एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के नेता परशुराम वाडेकर ने सोमवार को आयोजित पत्रकार परिषद में की।
उन्होंने कहा कि पार्टी का प्राथमिक रूप से अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण का विरोध है, क्योंकि इससे समाज में आंतरिक विभाजन और गुटबाजी बढ़ने की आशंका है। यदि किसी कारणवश उपवर्गीकरण करना अपरिहार्य हो, तो वह केवल राष्ट्रीय जातीय जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
वाडेकर ने बताया कि केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले के मार्गदर्शन में पार्टी ने यह स्पष्ट रुख अपनाया है। पत्रकार परिषद में पुणे शहर अध्यक्ष संजय सोनवणे, प्रदेश सचिव बालासाहेब जानराव, नगरसेवक निलेश अल्हाट, महिपाल वाघमारे, श्याम सदाफुले, बसवराज गायकवाड़, गोविंद साठे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जातियों के विभिन्न समाज वर्षों से सामाजिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करते आए हैं। ऐसे में जल्दबाजी में लिया गया कोई भी निर्णय समाज की एकता को नुकसान पहुंचा सकता है। जनगणना के माध्यम से प्रत्येक जाति की वास्तविक जनसंख्या सामने आने के बाद ही नीतिगत निर्णय लिए जाने चाहिए।
वाडेकर ने यह भी कहा कि राज्य के शेष 58 अनुसूचित समाज घटकों को भी शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलना चाहिए। साथ ही वर्ष 2027 की जनगणना के बाद जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की समीक्षा करने की भी मांग की।
इस अवसर पर शहर अध्यक्ष संजय सोनवणे ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले के बयान को संदर्भ से हटाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, जिससे अनुसूचित समाज के विभिन्न वर्गों में भ्रम और तनाव पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रदेश सचिव बालासाहेब जानराव ने बताया कि अनुसूचित जातियों में कुल 59 जातियां शामिल हैं और उपवर्गीकरण के मुद्दे पर दो समाजों के बीच तनाव का माहौल बन रहा है। इस तनाव को समाप्त करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) राज्यभर में ‘सलोखा परिषद’ आयोजित करेगी।
मुख्य मांगें
अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण से पहले राष्ट्रीय जातीय जनगणना पूरी की जाए।
उपवर्गीकरण केवल वास्तविक जनसंख्या के अनुपात में किया जाए।
जनगणना के आधिकारिक आंकड़े आने से पहले कोई निर्णय न लिया जाए।
सभी अनुसूचित समाज घटकों को शिक्षा और रोजगार में समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
वर्ष 2027 की जनगणना के बाद जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की समीक्षा की जाए।
जातीय जनगणना के बाद ही हो अनुसूचित जातियों का उपवर्गीकरण : उपमहापौर परशुराम वाडेकर

