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मंत्री चंद्रकांत पाटिल के जन्मदिन पर ‘सखी-सुखदा’ का आनंदोत्सव; वृद्धाश्रम और बांझपन की समस्या के समाधान का लिया संकल्प

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पुणे :  महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल के जन्मदिन के अवसर पर कोथरुड स्थित सखी-सुखदा वूमन वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित आनंदोत्सव समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंत्री पाटिल ने समाज में बढ़ रही वृद्धाश्रमों की संख्या और बांझपन (इन्फर्टिलिटी) जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए ठोस पहल करने का संकल्प व्यक्त किया।
फाउंडेशन द्वारा अब तक बस्ती क्षेत्रों की 900 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसूति के लिए सहायता प्रदान की गई है। इसी उपलब्धि के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह में 1800 बच्चों को आधार कार्ड और सुकन्या समृद्धि योजना के कार्ड वितरित किए गए। साथ ही लकी ड्रॉ के माध्यम से पांच बच्चों को विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में फाउंडेशन की संचालिका स्मिता पाटिल, एडवोकेट तनिषा पाटिल, उद्योगपति ललित कुमार जैन, झोपड़पट्टी पुनर्वसन विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश खडके, सुरेखा जगताप, धनश्री चितळे सहित बड़ी संख्या में महिला सदस्य एवं नागरिक उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि स्मिता पाटिल के नेतृत्व में सखी-सुखदा परियोजना ने समाज में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बस्ती क्षेत्रों की अनेक गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व उपलब्ध कराना ‘आनंदी कोथरुड’ संकल्प की भावनात्मक पूर्ति है।
उन्होंने कहा कि आज समाज में वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या और बांझपन की समस्या गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने समाज के सक्षम और दानशील लोगों से अपील की कि वे किसी वृद्ध दंपति या अकेली वृद्ध महिला का अभिभावक बनकर उनकी जिम्मेदारी उठाएं, जिससे वृद्धाश्रम जैसी व्यवस्था की आवश्यकता कम हो सके।
मंत्री पाटिल ने यह भी घोषणा की कि कोल्हापुर के ‘हितैषी’ मॉडल की तर्ज पर सखी-सुखदा के अंतर्गत बांझपन निवारण के लिए परामर्श, दत्तक ग्रहण तथा फॉस्टर केयर प्रक्रिया हेतु एक नया केंद्र शुरू किया जाएगा। इसके अलावा नवजात शिशुओं की श्रवण क्षमता की जांच के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा।
कार्यक्रम में उद्योगपति ललित जैन और झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के सतीश खडके ने फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम का प्रास्ताविक स्मिता पाटिल ने किया।

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