पुणे/लोणी काळभोर २३ जून ः लोणी कालभोर के माइर्स विश्वराज हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बिना किसी सर्जिकल चीरे, एनेस्थीसिया या छाती खोले ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट (टीएवीआर )प्रोसीजर के जरिए मरीज के हार्ट वाल्व का काम ठीक कर दिया.जिससे ७५ साल के मरीज को नई जिंदगी मिली. दिलचस्प बात यह है कि करीब डेढ घंटे तक चले इस प्रोसीजर के दौरान मरीज पूरी तरह होश में था और मेडिकल टीम से बातचीत कर रहा था. यह जानकरी विश्वराज हॉस्पिटल के कर्डियोलॉजिस्ट डॉ. सूरज इंगोले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी.
इस मौके पर विश्वराज हॉस्पिटल के एमडी डॉ. सुजीत कुमार और ऑपरेशन्स हेड डॉ. संतोष साहू मौजूद थे.
डॉ. सूरज इंगोले ने बताया कि मरीज ७५ साल के हैं और उन्हें दिल की बीमारी की कॉम्प्लिकेटेड मेडिकल हिस्ट्री है. १५ साल पहले उनकी कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी हुई थी. फिर २ साल पहले हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी की गई थी. उस समय उन्हें एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस यानी दिल के मुख्य वाल्व का सिकुडना डायाग्नोस हुआ था. उन्हें कभी कभी चक्कर आ रहे थे, और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. उनकी बढती उम्र और पिछले दो हार्ट वाल्व प्रोसीजर को देखत हुए ट्रेडिशनल ओपन हार्ट सर्जरी से वाल्व बदलना बहुत रिस्की था. इस वजह से विश्वराज हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट की टीम ने मरीज के लिए सबसे सेफ ऑप्शन के तौर पर मिनिमली इनवेसिव और नॉन सर्जिकल तरीका इस्तेमाल करने का फैसला किया. इस प्रोसीजर में, दिल तक पहुंचने के लिए जांघ में ब्लड वेसल में सुई के जरिए एक छोटा सा छेद किया जाता है. एक तार की मदद से नए वाल्व को कैथेटर के जरिए ले जाया जाता है और इसे सीधे डैमेज वाल्व में डाल दिया जाता है. इस प्रोसीजर में छाती में कोई चीरा लगाने या खोलने की जरुरत नहीं होती है. यह एक मिनिमली इनवेसिव नॉन-सर्जिकल प्रोसीजर है. मरीज की छाती खोले बिना हार्ट वाल्व बदला जाता है.
टीएवीआर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में एक बडी कामयाबी है. यह प्रोसीजर उन लोंगो के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें ट्रेडिशनल सर्जरी से ज्यादा रिस्क होता है. इसने एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस वाले मरीजों के लिए नई संभावनाएँ पैदा की हैं. यह कम रिस्क वाला प्रोसीजर है और मरीज अपने रिकवरी रेट के आधार पर ४८ घंटे या तीन से पाँच दिन में घर लौट सकते है.
डॉ. सुजीथ कुमार ने बताया कि मरीज को प्रोसीजर से एक दिन पहले भर्ती किया गया था. प्रोसीजर के अगले ही दिन उसे चलने के लिए कहा गया और चौथे दिन उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई. ट्रेडिशनल ओपन हार्ट सर्जरी में इतनी तेजी से ठीक होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती. इसमें कोई सर्जिकल निशान नहीं होता. साथ ही इसमें लंबे समय तक ठीक होने का कोई प्रोसेस नहीं होता. एक महीने के चेक-अप में मरींज की हालत ठीक है अव बिना किसी लक्षण के है.
मरीज ने कहा कि हमने डर के मारे ढॅूढना शुरू किया और फिर विश्वराज हॉस्पिटल में डॉ. इंगोले से मिले. उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि टीएवीआर मेरे लिए सुरक्षित रहेगा. उन्होंने आगे कहा कि हॉस्प्टिल का स्टाफ और डॉक्टर बहुत अच्छे है.
विश्वराज हॉस्पिटल की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. अदिति कराड की मार्गदर्शन में यह हॉस्पिटल तेजी से विस्तार कर रहा है. यह ३०० बेड का सुपर स्पेशियलिटी टर्शियरी केयर हॉस्पिटल है. यह हेल्थकेयर पर फोकस करता है और कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी और दूसरे मेडिकल फील्ड में एडवांस्ड सर्विस देता है.
यह प्रोसीजर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सूरज इंगोले ने किया. एनेस्थेटिस्ट डॉ. क्षितिज गायकवाड आौर डॉ. दीपक कवडे, असिस्टेंड डॉ. विष्णु और डॉ. अनघा, टेक्नीशियन मनोज और कल्याणा तथा स्टाफ नर्स अमित तथा मीना ने मदद की.

