पुणे : पुणे महानगरपालिका के उपमहापौर परशुराम वाडेकर के विशेष प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। महात्मा ज्योतिराव फुले की द्विशताब्दी वर्ष तथा चवदार तालाब सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पुणे महानगरपालिका द्वारा पूरे वर्ष सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस प्रस्ताव को सोमवार को हुई पक्षनेता सभा में मंजूरी दे दी गई।
उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने 5 मई 2026 को पत्र क्रमांक 1810 के माध्यम से इस ऐतिहासिक अवसर पर भव्य एवं सुव्यवस्थित कार्यक्रम आयोजित करने के लिए एक विशेष समिति गठित करने की मांग की थी, जिसे अब औपचारिक स्वीकृति मिल गई है।
इस वर्ष देशभर में महात्मा ज्योतिराव फुले का द्विशताब्दी वर्ष उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। साथ ही, पुणे महानगरपालिका के सदस्य के रूप में उनके योगदान के 150 वर्ष तथा सामाजिक समता के इतिहास में महत्वपूर्ण चवदार तालाब सत्याग्रह के 100 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। महात्मा फुले की कर्मभूमि पुणे में इन ऐतिहासिक अवसरों को भव्य रूप से मनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।
इससे पहले पुणे महानगरपालिका की स्थायी समिति ने इस उपक्रम के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराने को मंजूरी दी थी। वहीं अप्रैल 2026 में हुई मुख्य सभा में सभी दलों के नगरसेवकों ने वर्षभर विविध कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की थी। उस समय सभापति के रूप में उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने प्रशासन को समिति गठित कर विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए थे।
स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, पुणे महानगरपालिका के सभी पदाधिकारी, दलों के नेता तथा नगरसेवकों को शामिल करते हुए एक समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति पूरे वर्ष आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की योजना, समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाएगी। समिति के दो सदस्यों की नियुक्ति पक्षनेता सभा द्वारा की जाएगी, जबकि कार्यक्रमों के संचालन एवं क्रियान्वयन के अधिकार महापौर मंजुषाताई नागपुरे को सौंपे गए हैं।
इस अभियान के तहत सांस्कृतिक कार्यक्रम, विद्यालय एवं महाविद्यालयों में भाषण, निबंध, चित्रकला और अन्य प्रतियोगिताएं, विचार गोष्ठियां, व्याख्यान, शोभायात्राएं, प्रदर्शनियां, सामाजिक जनजागरूकता अभियान तथा महात्मा फुले के समता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के विचारों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न कार्यक्रम पूरे वर्ष आयोजित किए जाएंगे।
उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने विश्वास व्यक्त किया कि इस निर्णय से महात्मा ज्योतिराव फुले के विचारों और सामाजिक परिवर्तन के उनके महान कार्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार होगा तथा नई पीढ़ी तक उनका प्रेरणादायी संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

