पुणे, । भारत में महिला शिक्षा की क्रांति की जन्मस्थली माने जाने वाले बुधवार पेठ स्थित ऐतिहासिक भिडे वाड़ा को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित करने का कार्य तेज़ी से जारी है। पुणे के उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने गुरुवार को निर्माण स्थल का दौरा कर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी ली।गौरतलब है कि महात्मा ज्योतिराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले ने वर्ष 1848 में इसी ऐतिहासिक भवन में भारत की पहली बालिका विद्यालय की स्थापना कर महिला शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। इसी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से पुणे महानगरपालिका द्वारा यहां भव्य राष्ट्रीय स्मारक का निर्माण कराया जा रहा है।
उपमहापौर ने कहा, “जिस भूमि से भारत में बालिका शिक्षा की पहली किरण फूटी, उसी भिडे वाड़ा का राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित होना पुणे के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है।
निरीक्षण के दौरान उपमहापौर परशुराम वाडेकर ने कहा कि “भिडे वाड़ा केवल एक इमारत नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और देश की सामाजिक क्रांति का साक्षी है। इसके संरक्षण के लिए वर्षों तक संघर्ष, आंदोलन और लगातार प्रयास किए गए। आज इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में आकार लेते देखना गर्व और संतोष का विषय है।”
उन्होंने कहा कि यह स्मारक महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के विचारों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। साथ ही देशभर से आने वाले विद्यार्थी, नागरिक और पर्यटक यहां से प्रेरणा प्राप्त करेंगे।
निरीक्षण के दौरान भवन विभाग के अधीक्षक अभियंता बिपिन शिंदे, कार्यकारी अभियंता धायगुडे, उप अभियंता पांडकर तथा वास्तुकार धनंजय सालकर भी उपस्थित थे। अधिकारियों ने स्मारक निर्माण की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और आगामी चरणों की जानकारी उपमहापौर को दी।

