पुणे, 20 जुलाई। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने केंद्र की मोदी सरकार पर लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लद्दाख के पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर किए जा रहे शांतिपूर्ण सत्याग्रह को पुलिस के माध्यम से रोकना निंदनीय है और इससे सरकार का संविधान विरोधी रवैया उजागर हुआ है।
तिवारी ने कहा कि नीट परीक्षा पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर जवाबदेही तय करने की मांग पूरी तरह उचित है। उनका आरोप है कि आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने के बाद केंद्र सरकार ने पुलिस और अस्पताल कर्मियों की मदद से सोनम वांगचुक को जबरन हटाकर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस प्रकार की कार्रवाई सरकार की अहंकारी मानसिकता को दर्शाती है। कांग्रेस इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है।
गोपालदादा तिवारी ने एनडीए के सहयोगी दलों से भी अपील करते हुए कहा कि वे केंद्र सरकार की कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज नहीं उठाई गई तो देश को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी एनडीए के सहयोगी दलों पर भी होगी।
मोदी सरकार पर संविधान विरोधी होने का आरोप

