Site icon Jan Bharat Samachar

मोदी सरकार संविधान विरोधी, छात्रों पर लाठीचार्ज लोकतंत्र पर हमला : कांग्रेस

Spread the love

पुणे, 19 जुलाई 2026। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीट पेपर लीक प्रकरण और छात्रों की आत्महत्या के मामलों में शिक्षा मंत्री को बचाने की कोशिश से मोदी सरकार का कथित भ्रष्ट चेहरा उजागर हो गया है।

उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक और इससे जुड़े मामलों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में पिछले दो महीनों से विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों के साथ संवाद और आंदोलन चल रहा है, जिसे व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है।

तिवारी ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद इसी मुद्दे पर लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उच्च न्यायालय का हवाला देते हुए पुलिस के माध्यम से इस सत्याग्रह को दबाने का प्रयास किया, जिसकी कांग्रेस कड़े शब्दों में निंदा करती है।

कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, इस कार्रवाई से एक बार फिर मोदी सरकार की कथित मनमानी और संवैधानिक लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने वाली कार्यशैली सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया संविधान विरोधी है और लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करता है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि आंदोलन कर रहे छात्रों पर निर्दयतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया, जो सरकार के अहंकारी रवैये का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक और अन्य आंदोलनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तथा युवाओं के भविष्य को लेकर जवाबदेही की मांग उठाई थी, लेकिन सरकार ने आंदोलन को कुचलने के लिए उन्हें अचानक हिरासत में ले लिया।

गोपालदादा तिवारी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन को दबाना संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार के असहिष्णु और दमनकारी रवैये को उजागर करता है।

उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों से अपील की कि वे केंद्र सरकार की कथित मनमानी और लोकतंत्र विरोधी कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करें। तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते स्थिति नहीं बदली गई तो देश आर्थिक और सामाजिक संकटों की ओर बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी एनडीए के सहयोगी दलों पर भी होगी।

Exit mobile version