पुणे : जीवन के एक कठिन मोड़ पर गुस्से में हुई एक गलती के कारण सजा काट रहे बंदियों के जीवन में अब नई उम्मीद की शुरुआत हो रही है। नकारात्मक सोच से बाहर निकालकर उनमें सकारात्मक ऊर्जा और रचनात्मकता विकसित करने के उद्देश्य से येरवडा केंद्रीय कारागार में बंदी भाइयों के लिए इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा निर्माण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
यह कार्यशाला महाराष्ट्र कारागृह प्रशासन, भोई प्रतिष्ठान, पुणे तथा आदर्श मित्र मंडल, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में संचालित ‘प्रेरणापथ’ परियोजना के अंतर्गत आयोजित की गई। पिछले 12 वर्षों से यह परियोजना बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके भीतर छिपे अच्छे इंसान एवं प्रतिभा को सामने लाने का कार्य कर रही है।
कार्यशाला का मार्गदर्शन विश्वप्रसिद्ध शिल्पकार विवेक खटावकर तथा युवा शिल्पकार विराज खटावकर ने किया। प्रशिक्षण के दौरान बंदियों ने मिट्टी गूंधने से लेकर पर्यावरण अनुकूल भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कलात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
यह कार्यशाला महाराष्ट्र कारागृह प्रशासन के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. सुहास वारके, कारागृह उपमहानिरीक्षक योगेश देसाई, येरवडा केंद्रीय कारागार के अधीक्षक सुनील ढमाळ, अतिरिक्त अधीक्षक पल्लवी कदम, सामाजिक कार्यकर्ता उदय जगताप तथा जेल अधिकारी शिवाजी पाटील के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।
परियोजना के समन्वयक एवं महाराष्ट्र राज्य युवा नीति समिति के मानद सदस्य प्रा. डॉ. मिलिंद भोई ने बताया कि ‘प्रेरणापथ’ परियोजना का उद्देश्य बंदियों को निराशा से बाहर निकालकर उनके हाथों से सकारात्मक और रचनात्मक कार्य करवाना है। उन्होंने कहा कि इस पहल को समाज के विभिन्न वर्गों से लगातार उत्साहजनक समर्थन मिल रहा है।
विश्वप्रसिद्ध शिल्पकार विवेक खटावकर ने कहा कि यदि बंदियों की ऊर्जा और कलात्मक प्रतिभा को सही दिशा मिले, तो वे भविष्य में उत्कृष्ट कलाकृतियों का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने इसे अपने कला जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बताया।
कार्यशाला में शिल्पकार शशिकांत राहूकर, अमित कलाल, रोहित गोळे, कागज शिल्प विशेषज्ञ पुंडलिक खलोलकर, शुभम मेदनकर, प्रवीण सोनवणे तथा संजय मोरे ने भी प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया।
इस अवसर पर आयोजकों ने समाज के नागरिकों और गणेश मंडलों से अपील की कि वे बंदियों द्वारा निर्मित पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमाओं को खरीदकर उनके पुनर्वास और नए जीवन की शुरुआत में सहभागी बनें।
कार्यक्रम का संचालन जेल अधिकारी शिवाजी पाटील ने किया, जबकि शिक्षक नामदेव शिंदे ने आभार व्यक्त किया।

