पुणे: भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में अग्रणी संस्था गोपाल गायन समाज के शतकोत्तर समारोह के अवसर पर पुणे का परांजपे परिवार महान गायक-अभिनेता बालगंधर्व का ऐतिहासिक तानपुरा संस्था को भेंट करेगा। यह कार्यक्रम गुरुवार, 23 जुलाई को सायं 5:30 बजे टिलक रोड स्थित न्यू इंग्लिश स्कूल के गणेश सभागार में आयोजित स्वर संध्या के प्रारंभ में संपन्न होगा। यह जानकारी प्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट एवं इस ऐतिहासिक तानपुरे के संरक्षक डॉ. रामचंद्र (बालासाहेब) परांजपे ने दी।
डॉ. रामचंद्र परांजपे की माताश्री स्व. कमलाबाई परांजपे गोपाल गायन समाज में पंडित गोविंदराव देसाई से संगीत की शिक्षा प्राप्त करती थीं। प्रत्येक जन्माष्टमी (गोकुलाष्टमी) उत्सव में उनका गायन होता था। वर्ष 1921 में मुंबई में संयुक्त मानापमान नाटक के मंचन के दौरान संगीतसूर्य केशवराव भोसले ने अपना तानपुरा स्नेहपूर्वक बालगंधर्व को भेंट किया था।
जब भी बालगंधर्व पुणे आते, वे स्व. बापूसाहेब और कमलाबाई परांजपे के घर ठहरते तथा उन्हें नाट्यसंगीत का प्रशिक्षण भी देते थे। उसी दौरान उन्होंने केशवराव भोसले से प्राप्त यह तानपुरा परांजपे परिवार को सौंप दिया। बाद में उनके पुत्र डॉ. रामचंद्र (बालासाहेब) परांजपे ने इस ऐतिहासिक धरोहर का वर्षों तक अत्यंत सावधानी से संरक्षण किया।
अब यही अमूल्य और ऐतिहासिक तानपुरा गोपाल गायन समाज को भेंट किया जाएगा। गोपाल गायन समाज के डॉ. विकास कशाळकर ने बताया कि 100 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह तानपुरा आज भी उत्कृष्ट और सुरक्षित अवस्था में है।
पंडित गोविंदराव देसाई, संगीताचार्य पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर के प्रमुख शिष्य थे। गुरु की प्रेरणा से उन्होंने पुणे में शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार का कार्य प्रारंभ किया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से वर्ष 1926 में उन्होंने गोपाल गायन समाज की स्थापना की तथा संस्था का स्वतंत्र संगीत पाठ्यक्रम भी शुरू किया।
बालगंधर्व का ऐतिहासिक तानपुरा परांजपे परिवार करेगा गोपाल गायन समाज को समर्पित

