दिल्ली में लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरे हजारों छात्र-छात्राएं;
मोदी-प्रधान के इस्तीफे की मांग, लाल महल से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकला विशाल मार्च
पुणे। शिक्षा का हब और शिक्षा का मायका कहे जाने वाले पुणे में शुक्रवार को छात्रों का अभूतपूर्व शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज के विरोध में सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के आह्वान पर पुणे के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतर आए। केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने दोनों के इस्तीफे की मांग की।
पुणे में देशभर से लाखों विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए आते हैं। शहर में बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और शैक्षणिक संस्थान होने के कारण पुणे को शिक्षा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इसी शैक्षणिक नगरी के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने शुक्रवार को एकजुट होकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। यह आंदोलन जुम्मे की नमाज खत्म होने के बाद शुरू किया गया। जिससे इसमें वर्ग विशेष के लोगों की उपस्थिति ज्यादा दिखाई दी। देखते ही देखते लाल महल से जिलाधिकारी कार्यालय तक जाने वाला मार्ग प्रदर्शनकारियों से पट गया।
सीजेपी के आह्वान पर निकाले गए इस विशाल मार्च में छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा। हाथों में तिरंगा और सरकार विरोधी नारों के साथ युवा प्रदर्शनकारी पूरे रास्ते आगे बढ़ते रहे। प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जोर-शोर से उठाई गई। दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी प्रदर्शनकारियों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ लिखी गई तख्तियां बड़ी संख्या में उठा रखा था। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपात के जनक कार्टून फोटो आदि को कैप्शन के साथ लिखा गया था।
प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के कारण पुणे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। करीब तीन घंटे से अधिक समय तक शहर के मध्य भाग सहित कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें लग गईं और हजारों नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शन के कारण दस से अधिक एंबुलेंस भी अलग-अलग स्थानों पर यातायात जाम में फंसी रहीं, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी विपरीत असर पड़ा।
लाल महल से शुरू हुआ यह मार्च जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने के बाद विशाल सभा में तब्दील हो गया। जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी अधिक थी कि परिसर और आसपास की सड़कें भीड़ से भर गईं। स्थिति यह थी कि कई मार्गों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची। प्रदर्शनकारियों के लगातार बढ़ते हुजूम के चलते प्रशासन और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी और हुल्लड़बाजी भी की। सरकार के खिलाफ कुछ आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे भी लगाए गए। कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा जोश में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला भी सामने आया। हालांकि, पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम बरता और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी।
विशाल छात्र आंदोलन को देखते हुए पुणे पुलिस आयुक्त सहित पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी स्वयं सड़क पर उतरे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने की अपील करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।
पुणे में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के एक साथ सड़कों पर उतरने से शहर की राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। शिक्षा की राजधानी माने जाने वाले पुणे में छात्रों के इस विशाल प्रदर्शन ने केंद्र सरकार के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को सामने ला दिया। समाचार लिखे जाने तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं थी, लेकिन तीन घंटे से अधिक समय तक चले इस आंदोलन ने पूरे पुणे शहर की रफ्तार रोक दी और शहर को मानो थामकर रख दिया।

