पुणे : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुणे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए इस सम्मान से सम्मानित किया गया।
मिस्टर अजीत डोभाल ने देश के कई संवेदनशील क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में राजनयिक जिम्मेदारियां भी निभाई हैं।
डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक कार्यरत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। भारत-चीन सीमा वार्ता के लिए वे भारत के विशेष प्रतिनिधि के रूप में भी भूमिका निभा चुके हैं। डोकलाम गतिरोध को सुलझाने के लिए हुए कूटनीतिक प्रयासों में भी उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना जाता है।
1983 में शुरू हुआ था पुरस्कार
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी। यह पुरस्कार पहली बार समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को प्रदान किया गया था। हर वर्ष 1 अगस्त को लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि के अवसर पर राष्ट्र की प्रगति और विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को यह सम्मान दिया जाता है।
इससे पहले यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा वरिष्ठ राजनेता शरद पवार सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को प्रदान किया जा चुका है।
अमित शाह ने अण्णाभाऊ साठे को भी दी श्रद्धांजलि
पुणे दौरे के दौरान अमित शाह ने महान मराठी लोकशाहीर एवं समाज सुधारक लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की। सरसबाग क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार सहित कई स्थानीय नेता एवं गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
अण्णाभाऊ साठे का जन्म 1 अगस्त 1920 को हुआ था। वे महाराष्ट्र के प्रख्यात समाज सुधारक, लोक कवि और दलित साहित्य के अग्रणी साहित्यकारों में से एक थे। उनके साहित्य और सामाजिक विचारों ने समाज में समानता और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

