पुणे : माता-पिता की गोद में अभी-अभी खिली छह माह की नन्ही बच्ची की जिंदगी में अब जल्द ही आवाजों की दुनिया दस्तक देगी। गंभीर श्रवणदोष के कारण बच्ची दुनिया की आवाजों से दूर थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसके उपचार में बड़ी बाधा आ रही थी। ऐसे समय में सामाजिक संवेदना के साथ कई हाथ मदद के लिए आगे आए और बच्ची के उपचार की उम्मीद जगी।
कोथरुड के केळेवाड़ी निवासी मेघा बोडके ने छह माह पहले एक बच्ची को जन्म दिया था। जन्म के बाद हुई विभिन्न चिकित्सकीय जांचों में बच्ची को गंभीर श्रवणदोष होने का पता चला। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उसके बेहतर भविष्य के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट (Cochlear Implant) सर्जरी कराने की सलाह दी।
इस सर्जरी के लिए करीब 10 लाख रुपये का खर्च अपेक्षित था। इतनी बड़ी राशि जुटाना बोडके परिवार के लिए मुश्किल था। माता-पिता की इच्छा थी कि उनकी बच्ची एक दिन मां की आवाज सुन सके, उसकी पुकार का जवाब दे सके, अन्य बच्चों की तरह शिक्षा हासिल करे और आत्मविश्वास के साथ अपना भविष्य बना सके।
चंद्रकांतदादा पाटील ने की मदद की पहल
बोडके परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्ची की समस्या की जानकारी सखी-सुखदा वुमन वेलफेयर फाउंडेशन की संचालिका स्मिता पाटील ने राज्य के मंत्री एवं कोथरुड के विधायक चंद्रकांतदादा पाटील को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए चंद्रकांतदादा पाटील ने लोकसहभागिता के माध्यम से बच्ची के उपचार के लिए आर्थिक सहायता जुटाने का निर्णय लिया।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित सखी-सुखदा फाउंडेशन के कार्यक्रम में भी उन्होंने बच्ची के उपचार के लिए नागरिकों से सहायता की अपील की।
सामूहिक प्रयासों से जुटी उपचार की राशि
इस अपील को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। सखी-सुखदा वुमन वेलफेयर फाउंडेशन, भाऊ फाउंडेशन और एड. तनिषा समीर पाटील ने बच्ची के उपचार के लिए आर्थिक सहायता का हाथ बढ़ाया। इन सामूहिक प्रयासों से कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराई गई।
यह आर्थिक सहायता बच्ची के उपचार के लिए परिवार को सौंपी गई। इस मदद के पीछे केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि एक नन्ही जिंदगी को आवाजों की दुनिया से जोड़ने, उसके चेहरे पर मुस्कान लाने और उसके भविष्य को नई दिशा देने की भावना है।
अब सुनने-बोलने और सीखने का मिलेगा अवसर
गंभीर श्रवणदोष के कारण आवाजों की दुनिया से दूर रही इस नन्ही बच्ची के लिए अब उपचार का रास्ता खुल गया है। चंद्रकांतदादा पाटील की पहल तथा सखी-सुखदा फाउंडेशन, भाऊ फाउंडेशन और एड. तनिषा पाटील के सहयोग से उसकी कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी संभव हो सकेगी।
इस उपचार के बाद बच्ची को सुनने, बोलने, सीखने और आत्मविश्वास के साथ उज्ज्वल भविष्य बनाने का अवसर मिलने की उम्मीद है। एक नन्ही जिंदगी में आवाज और उम्मीद लौटाने की यह पहल मानवीय संवेदना और सामाजिक सहभागिता का प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है।

