पुणे, प्रतिनिधि: ‘गोविंदा रे गोपाला’ के जयघोष, ढोल-ताशों की गूंज, हलगी की दमदार ताल और हजारों नागरिकों की उत्साहपूर्ण मौजूदगी के बीच पुनीत बालन ग्रुप द्वारा आयोजित संयुक्त डीजे-मुक्त दहीहांडी उत्सव ने पुणेकरों को रोमांचित कर दिया। ऐतिहासिक लाल महल चौक पर आयोजित इस भव्य उत्सव में शिवतेज दहीहांडी संघ ने सात स्तर का मानव पिरामिड बनाकर दहीहांडी फोड़ने का गौरव प्राप्त किया। लगातार दूसरे वर्ष डीजे-मुक्त दहीहांडी का आयोजन कर पुनीत बालन ग्रुप ने एक सकारात्मक सामाजिक संदेश भी दिया।
इस संयुक्त दहीहांडी उत्सव में पुणे के 31 सार्वजनिक गणेश मंडलों ने सहभागिता की। पुनीत बालन ग्रुप के अध्यक्ष पुनीत बालन ने पिछले वर्ष महाराष्ट्र की पहली डीजे-मुक्त दहीहांडी आयोजित की थी, जिसे व्यापक सराहना मिली थी। इस वर्ष डीजे को लेकर चल रही बहस के बीच भी उन्होंने डीजे-मुक्त दहीहांडी और गणेशोत्सव मनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसे 31 गणेश मंडलों का समर्थन मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात बैंड के मधुर वादन से हुई। इसके बाद श्रीमंत पेशवे गणेश मंदिर और लाल महल में राजमाता जिजाऊ को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मानवंदना, रमणबाग, गजर प्रतिष्ठान, शिवाज्ञा ढोल, शिवयोद्धा मर्दानी अखाड़ा, आवर्तन, समर्थ और शिवमुद्रा पथकों ने अपने जोशीले प्रदर्शन से माहौल को उत्सवमय बना दिया। युवाओं ने ढोल-ताशों की ताल पर जमकर उत्साह व्यक्त किया।
शिवाज्ञा पथक ने जत्रा-यात्रा के बगाड और श्रीनाथ बाबा की पालखी का आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया, जबकि वारकरी परंपरा के पखावज वादन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। हलगी के दमदार प्रदर्शन ने भी लोगों का भरपूर मनोरंजन किया।
छत्रपति शिवाजी महाराज रोड स्थित लाल महल चौक को विशेष रूप से सजाया गया था। आकर्षक विद्युत सज्जा, कोल्ड फायर आतिशबाजी और भव्य दहीहांडी सभी के आकर्षण का केंद्र रही। दहीहांडी को 21 से अधिक गोविंदा पथकों ने पांच से सात स्तर के मानव पिरामिड बनाकर सलामी दी।
दहीहांडी सलामी की शुरुआत महिला गोविंदा पथक ‘शिवकन्या’ ने की। इसके बाद कसबा पुणे, म्हसोबा दहीहांडी संघ, पंढरीनाथ सेवा मंडल, पुणेश्वर कसबा पेठ, गणेश मित्र मंडल, राष्ट्र प्रथम कसबा पेठ, भोईराज संघ, मुंबई के ‘आम्ही आमचे राजे’ तथा शिवतेज संघ सहित अनेक पथकों ने भाग लिया।
रात्रि लगभग 9:45 बजे शिवतेज दहीहांडी संघ ने सात स्तर का मानव पिरामिड बनाकर दहीहांडी फोड़ने में सफलता हासिल की। विजेता संघ को 1 लाख 11 हजार रुपये का पुरस्कार तथा मानचिन्ह ट्रॉफी प्रदान की गई।
उत्सव में अनेक गणमान्य व्यक्तियों के साथ विदेशी पर्यटकों ने भी भाग लेकर महाराष्ट्र की इस सांस्कृतिक परंपरा का आनंद लिया।
पुनीत बालन ने कहा, “लगातार दूसरे वर्ष पुणेकरों ने डीजे-मुक्त दहीहांडी को उत्साहपूर्वक समर्थन दिया है। इससे यह सिद्ध हुआ है कि ढोल-ताशा, हलगी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी दहीहांडी उतने ही उत्साह और भव्यता के साथ मनाई जा सकती है। इससे ध्वनि प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है और पारंपरिक वाद्य बजाने वाले कलाकारों को रोजगार भी मिलता है। आगामी गणेशोत्सव भी इसी सकारात्मक भावना के साथ मनाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।”

