पुणे, : दुनिया भर में चल रहे युद्ध, आतंकवादी गतिविधियां और हिंसक संघर्षों से मानव जीवन को हो रहा भारी नुकसान बेहद चिंताजनक और निंदनीय है। जातीय और सांप्रदायिक हिंसा में निर्दोष लोगों की हत्या भी दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे भीषण संकटों का सामना कर रही दुनिया को शांति की सख्त जरूरत है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’ का भारतीय संस्कृति का संदेश पूरी दुनिया को विनाश की छाया से बचा सकता है, ऐसा विचार माईर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने व्यक्त किया।
सभी राष्ट्रों और लोगों के बीच शांति के आदर्शों को याद करने और मजबूत करने के लिए समर्पित दिन है अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस। इसी के उपलक्ष्य में एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी की ओर से ‘विश्व में शांति की जरूरत’ विषय पर डॉ. कराड के कक्ष में परिसंवाद का आयोजन किया गया था।
इस अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल विश्वनाथ कराड, कुलपति प्रो. डॉ. रविराज एन. सिताराम, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एन. पठाण, प्रसिद्ध वार्ताकार व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. संजय उपाध्ये, डब्ल्यूपीयू के कुलसचिव प्रो. गणेश पोकले, पीस स्टडी के प्रो. डॉ. मिलिंद पात्रे, डॉ. महेश थोरवे, मंदार बोकिल, अजय महाजन* और योगेश पारखी उपस्थित थे।
डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा, “दार्शनिक संतश्री ज्ञानेश्वर माउली से लेकर सहस्राब्दी के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन तक के ज्ञान-विज्ञान संगम के दर्शन का आधार भारतीय मूल विचारधारा अद्वैत है। ओम् और E=mc² के सिद्धांत की यात्रा ही विश्व कल्याण का सूत्र है। यही सूत्र भारत माता के रूप में विश्वगुरु बनकर पूरे विश्व को शांति और समृद्धि का मार्ग दिखाएगा।”
डॉ. राहुल कराड ने कहा, “शांति की संस्कृति विकसित करने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थान सहिष्णुता, विविधता, मानवाधिकार, संवाद और अहिंसक संघर्ष समाधान के बारे में समझ बढ़ा सकते हैं। डिजिटल युग में मीडिया और सोशल मीडिया साक्षरता भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि गलत जानकारी सामाजिक तनाव बढ़ा सकती है।”
प्रो. डॉ. रविराज एन. सिताराम ने कहा, “युद्ध, आतंकवाद और संघर्षों से घिरी दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए आवाज उठाना ही आज विश्व शांति दिवस का मुख्य उद्देश्य है।”
डॉ. संजय उपाध्ये ने कहा, “एक तरफ वैश्विक युद्ध का गंभीर संकट मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ हिंसा, रक्तपात और आतंकवाद ने पूरी दुनिया को संदेह और अविश्वास के अंधेरे में धकेल दिया है। इसका एकमात्र समाधान आपसी समझ और वैश्विक बंधुत्व की भावना को बढ़ाने का ईमानदार प्रयास है।”
‘एंजल ऑफ वर्ल्ड पीस’ पुरस्कार से सम्मानित डॉ. कराड ने पिछले चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और वैश्विक शांति के लिए कार्य किया है और विज्ञान व अध्यात्म के समन्वय से मूल्य-आधारित वैश्विक शिक्षा प्रणाली लागू की है। दुनिया के सबसे बड़े विश्व शांति गुंबद का निर्माण कर उन्होंने सर्वधर्म समभाव और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है।
जनसंपर्क विभाग,
एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे

