पुणे – स्वस्थ एवं निष्पक्ष लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल बर्खास्त किया जाना चाहिए। चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों पर बार-बार लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने से आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह आरोप महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने लगाया।तिवारी ने कहा कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के विभिन्न निर्णयों पर लिखित असहमति जताए जाने की खबरें सामने आई हैं। उनके अनुसार, इससे चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका की जांच करने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से मतदाता सूचियों में कथित मनमाने बदलाव तथा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का चुनाव आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
तिवारी ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी व्यवस्था में भी बदलाव कर भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर किया गया और उनकी जगह केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री को शामिल किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि इस व्यवस्था से चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा हुआ है।
उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 में से 31 सीटें कांग्रेस एवं इंडिया गठबंधन को मिली थीं, जबकि 17 सीटें भाजपा और उसके सहयोगी दलों के खाते में गई थीं। इसके कुछ ही महीनों बाद हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की संख्या में लगभग 41 लाख की वृद्धि तथा शाम 5.30 बजे के बाद मतदान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे।
तिवारी ने आरोप लगाया कि इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया और मतदान के बाद के सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का समाधान करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। लोकतंत्र में चुनावी संस्थाओं पर जनता का विश्वास सर्वोपरि है और किसी भी संदेह को दूर करने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

