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गणेशोत्सव में मुळशी के ढोल पथकों की करोड़ों की कमाई

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पुणे। इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान मुळशी तालुका के ढोल पथकों की मांग पुणे, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी देखने को मिली। गणेश मंडलों की विसर्जन शोभायात्राओं में मुळशी के ढोल पथकों की गूंज सुनाई दी और इन पथकों ने इस वर्ष लाखों रुपये की कमाई की।

मुळशी तालुका में करीब 50 से अधिक ढोल पथक सक्रिय हैं। भुकूम, पिरंगुट, आंबेगांव, मुकाईवाड़ी, बोतरवाड़ी, लवळे के साथ ही कोळवण, मुठा, मोसे, रिहे, बेलावड़े, भादस और बांध क्षेत्र के विभिन्न गांवों में भी ढोल पथक आज अपनी परंपरा को कायम रखे हुए हैं।

रिहे घाटी के पिंपळोली स्थित शेळकेवाड़ी के एक ढोल पथक ने इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान 12 दिनों में करीब 7 लाख रुपये की कमाई की। मनोरंजन और व्यायाम के आधुनिक साधन उपलब्ध होने के बावजूद क्षेत्र के युवा पारंपरिक कला, कसरत और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

एक घंटे के लिए 18 से 25 हजार रुपये तक मानधन

अधिकांश ढोल पथकों में 35 से अधिक कलाकार शामिल होते हैं। इनमें झांज वादक, ढोल वादक, ताशा वादक और घंटा वादक शामिल रहते हैं। इस वर्ष इन पथकों को कार्यक्रमों के लिए 18 से 25 हजार रुपये प्रति घंटे तक मानधन मिला।

पुणे क्षेत्र के गणेश मंडलों में यह दर करीब 18 से 20 हजार रुपये प्रति घंटे रही, जबकि मुंबई के गणेश मंडलों की विसर्जन शोभायात्राओं के लिए कुछ पथकों को करीब 25 हजार रुपये प्रति घंटे तक की सुपारी मिली।

एक दिन में दो-तीन मंडलों की सुपारी

कई ढोल पथकों ने गणेश विसर्जन के दूसरे, तीसरे, पांचवें, सातवें दिन के साथ ही अनंत चतुर्दशी की शोभायात्राओं की भी सुपारी ली। कुछ पथकों ने एक ही दिन में दो से तीन गणेश मंडलों की शोभायात्राओं में प्रस्तुति दी।

इसके चलते इस वर्ष प्रत्येक ढोल पथक को औसतन दो से ढाई लाख रुपये तक का मानधन मिलने की जानकारी सामने आई है। ढोल पथक अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि युवाओं के शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा सामाजिक एकता का माध्यम भी बन रहे हैं।

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