ठाणे में 48 लाख रुपये का खाद्य स्टॉक जब्त, 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज; भिवंडी में अवैध गोदामों में खाद्य पदार्थों की छंटाई किए जाने का आरोप
मुंबई: एक्सपायर्ड, क्षतिग्रस्त और गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय दोबारा बाजार में बेचे जाने के कथित मामले में महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य के विभिन्न जिलों में चलाए गए अभियान के दौरान करीब 48 लाख रुपये का खाद्य स्टॉक जब्त किया गया। इस मामले में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ब्लिंकिट कॉमर्स और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों सहित 10 लोगों के खिलाफ ठाणे के शांतिनगर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने एक्सपायर हो चुके, खराब और रिजेक्ट किए गए खाद्य उत्पादों की हेराफेरी और बिक्री के खिलाफ कई जिलों में छापेमारी की। इस दौरान 48 लाख रुपये कीमत का खाद्य स्टॉक जब्त किया गया। इसके बाद पुलिस ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के एक डायरेक्टर और 9 अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह FIR ठाणे के शांति नगर पुलिस थाने में दर्ज की गई है। इसमें 10 आरोपियों के नाम हैं, जिनमें रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकइट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी, साथ ही डिस्पोज़ल एजेंसी चलाने वाले और स्थानीय सप्लायर शामिल हैं।
यह FIR ‘खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006’ (Food Safety and Standards Act, 2006) और ‘भारतीय न्याय संहिता, 2023’ की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है। FIR में नामजद लोगों में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के होल-टाइम डायरेक्टर वी. सुब्रमण्यम, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के अशोक कुमार सिंह, रिलायंस रिटेल लिमिटेड के नॉमिनी विजय भिकाजी खर्माले और रिलायंस रिटेल लिमिटेड के वेयरहाउस मैनेजर नीलेश रामदासराव देशमुख शामिल हैं।
पुणे में सात टीमों ने की छापेमारी
FDA ने ठाणे और पुणे जिलों में संयुक्त निरीक्षण करने के लिए सात टीमें बनाईं, जिनमें असिस्टेंट कमिश्नर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने स्टॉक की सूची बनाई और उसे ज़ब्त कर लिया, सैंपल लिए, बयान दर्ज किए और ज़ब्त किए गए उत्पादों को कहीं और ले जाने, बेचने या नष्ट करने पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए। एक अधिकारी ने बताया कि 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद, पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए, जबकि बिना लाइसेंस वाली चार जगहों पर व्यावसायिक गतिविधियों को रोक दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, मामले में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक वी. सुब्रमण्यम सहित कंपनी से जुड़े अशोक कुमार सिंह का नाम शामिल है। इसके अलावा रिलायंस रिटेल लिमिटेड के नामित प्रतिनिधि विजय भिकाजी खरमाले और वेयरहाउस मैनेजर नीलेश रामदासराव देशमुख भी आरोपियों में शामिल हैं।
FIR में ब्लिंकिट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक अरबिंदर सिंह ढींढसा और दीपक सिंह के साथ जोमैटो हाइपरप्योर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े आबिद शेख का नाम भी दर्ज है। इनके अलावा खाद्य उत्पादों के निपटान से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधियों को भी आरोपी बनाया गया है।
नष्ट करने के प्रमाणपत्रों पर सवाल
जांच में आरोप लगाया गया है कि खाद्य उत्पादों के निपटान का काम करने वाली एजेंसियों ने संबंधित उत्पादों को नष्ट किए जाने का दावा करते हुए प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज जारी किए। हालांकि, इन उत्पादों को वास्तव में नष्ट किया गया था या नहीं, इसकी पर्याप्त पुष्टि नहीं की गई। FDA अधिकारियों को निपटान संबंधी रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां मिलीं। इनमें खाद्य पदार्थों की मात्रा में अंतर और माल भेजने वाले तथा प्राप्त करने वाले पक्षों के विवरण में विसंगतियां शामिल हैं।
भिवंडी के अवैध परिसरों में छंटाई का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, भिवंडी स्थित बिना लाइसेंस वाले परिसरों में खाद्य उत्पादों के स्टॉक की छंटाई की जाती थी। आरोप है कि वहां ऐसे पैकेट अलग किए जाते थे जो देखने में बिक्री योग्य लगते थे। इसके बाद इन उत्पादों को बिचौलियों और आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से बेचने का कथित प्रयास किया जाता था।
FDA की इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों के भंडारण, निपटान और दोबारा बिक्री की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले में दर्ज आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

