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IDBI बैंक की बिक्री अवैध, देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक: विश्वास उटगी

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मुनाफे में चल रही राष्ट्रीयकृत बैंक को विदेशी कंपनी को बेचने का आरोप; आत्मनिर्भरता को कमजोर करने वाला कदम बताया

 पुणे, (प्रतिनिधि)। IDBI बैंक देश की राष्ट्रीय संपत्ति है और इसे विदेशी कंपनी को बेचने का केंद्र सरकार का निर्णय अवैध तथा देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक है। यह आरोप बैंकिंग अर्थशास्त्री, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व निदेशक और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अर्थ विभाग के अध्यक्ष विश्वास उटगी ने लगाया। उन्होंने कहा कि मुनाफे में चल रही बैंक को विदेशी निवेशकों के नियंत्रण में देकर केंद्र सरकार आम नागरिकों के राष्ट्रीय संपत्ति पर अधिकार को कमजोर कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि इस निर्णय के विरोध में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आंदोलन करेगी।

कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को IDBI बैंक बेचने के केंद्र सरकार के निर्णय की पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने पत्रकार परिषद आयोजित की। इस दौरान विश्वास उटगी ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की।

राष्ट्रीय संपत्ति को बेचने का अधिकार किसी को नहीं: उटगी

विश्वास उटगी ने कहा कि बैंक देश की संपत्ति हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद इन्हीं बैंकों के माध्यम से देश में हरित क्रांति, श्वेत क्रांति और विकास की नींव मजबूत हुई। ऐसे में राष्ट्रीयकृत बैंक को विदेशी निवेशकों को बेचने का अधिकार किसी को नहीं है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में भी IDBI बैंक की बिक्री का मुद्दा उठा था। उस समय तत्कालीन भाजपा सरकार ने बैंक को बेचने का प्रयास किया था, जिसका कांग्रेस ने विरोध किया था। इसके बाद बैंक में विदेशी निवेश की सीमा को लेकर संसद में निर्णय लिया गया था। उटगी ने आरोप लगाया कि वर्तमान केंद्र सरकार अपने ही दल के वरिष्ठ नेताओं की पूर्व भूमिका और संसद में दिए गए आश्वासनों की अनदेखी कर रही है।

संसद की मंजूरी के बिना बिक्री पर उठाए सवाल

उटगी ने नोटबंदी सहित केंद्र सरकार के विभिन्न आर्थिक निर्णयों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विदेशी निवेश के नाम पर मुनाफे में चल रही IDBI बैंक को विदेशी कंपनी के नियंत्रण में देना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक की बिक्री के मामले में संसद में चर्चा और आवश्यक मंजूरी की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया की वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

उन्होंने दावा किया कि IDBI बैंक की बिक्री का सौदा 52,758 करोड़ रुपये में तय हुआ है, जबकि पुणे, मुंबई, हैदराबाद और देश के अन्य हिस्सों में बैंक की जमीनों का मूल्य एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने चेतावनी दी कि देश में वर्तमान में केवल 12 राष्ट्रीयकृत बैंक बची हैं और सरकार की नीतियों से सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

गोपालदादा तिवारी ने भी केंद्र सरकार को घेरा

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता गोपालदादा तिवारी ने आरोप लगाया कि आर्थिक घाटे को कम करने और विदेशी निवेश बढ़ाने के नाम पर केंद्र सरकार देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली राष्ट्रीयकृत बैंक में 51 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी बेचने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

तिवारी ने कहा कि जब IDBI बैंक घाटे में थी, तब LIC और केंद्र सरकार ने आम लोगों के 43,000 करोड़ रुपये लगाए। लेकिन जब बैंक ने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का स्तर कम कर लाभ की स्थिति हासिल की, तब सरकार विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर बैंक का नियंत्रण विदेशी पूंजी के हाथों में देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे संसद में भाजपा द्वारा दिए गए आश्वासनों के विपरीत बताया।

कम कीमत पर शेयर बेचने का भी आरोप

गोपालदादा तिवारी ने दावा किया कि वर्ष 2014 के अंत तक देश पर लगभग 55 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जो उनके अनुसार मोदी सरकार के कार्यकाल में बढ़कर 225 लाख करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में देश की अर्थव्यवस्था और विकास में योगदान देने वाली राष्ट्रीयकृत बैंक को विदेशी पूंजी के हवाले करना आत्मघाती कदम है।

तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि IDBI बैंक का शेयर 90 रुपये के स्तर पर होने के बावजूद उसकी बिक्री 81.50 रुपये प्रति शेयर की विशेष कीमत पर की गई। उन्होंने इसे आम नागरिकों के हितों के साथ विश्वासघात बताते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की।

कांग्रेस नेताओं ने IDBI बैंक की बिक्री के निर्णय पर पुनर्विचार करने और राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

नोट: इस समाचार में बिक्री, बैंक की संपत्तियों के मूल्य, कर्ज और शेयर की कीमत से संबंधित आंकड़े तथा कानूनी दावे संबंधित कांग्रेस नेताओं के बयानों पर आधारित हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्यों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।

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