श्रीनगर : कश्मीर में सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सह-अस्तित्व की परंपरा को उजागर करते हुए श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में दशहरा उत्सव उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति और पुनीत बालन ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में कश्मीरी पंडितों के साथ मुस्लिम, हिंदू और सिख समुदाय के लोगों के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरे के इस आयोजन के माध्यम से कश्मीर में विभिन्न धर्मों के बीच आपसी सम्मान, सामाजिक सौहार्द और सह-अस्तित्व का संदेश दिया गया। धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विभिन्न समुदायों के लोगों ने उत्सव में भाग लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि कश्मीर की साझा सांस्कृतिक परंपरा और मानवीय रिश्तों की भावना आज भी मजबूत है।

पुनीत बालन का महत्वपूर्ण योगदान
उत्सव के सफल आयोजन में पुनीत बालन और उनके समूह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके विशेष प्रयासों और व्यवस्थापकीय सहयोग से कार्यक्रम को भव्य स्वरूप दिया गया।
आयोजन के लिए कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने श्रीनगर जिला प्रशासन, श्रीनगर पुलिस एवं पूरे पुलिस प्रशासन, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए), श्रीनगर महानगरपालिका, यातायात पुलिस तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग का आभार व्यक्त किया। जेकेसीए की ओर से आयोजन के लिए मैदान और कर्मचारियों की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। समिति ने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और नागरिकों के प्रति भी आभार जताया।
धार्मिक सीमाओं से परे एकता का संदेश
दशहरा उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कश्मीर की बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बन गया। विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे की आस्था और परंपराओं का सम्मान करते हुए एक साथ उत्सव मनाया।
इस अवसर पर सत्य और सद्गुण की जीत के साथ करुणा, आपसी सम्मान, भाईचारे और एकता के मूल्यों का संदेश दिया गया। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा कश्मीर की विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को साथ लेकर आगे बढ़ने के लिए ऐसे सामूहिक आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
समारोह के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि कश्मीर सभी नागरिकों का साझा क्षेत्र है और इसका उज्ज्वल भविष्य सामाजिक सौहार्द, सह-अस्तित्व और साझा मानवीय मूल्यों में निहित है।
“कश्मीर में दशहरा उत्सव के माध्यम से विभिन्न धर्मों और समुदायों के नागरिकों का एक साथ आना बेहद खुशी और गर्व की बात है। त्योहार केवल धार्मिक परंपराओं का प्रतीक नहीं होते, बल्कि समाज के लोगों को जोड़ने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम भी हैं। कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को बनाए रखने के लिए ऐसे आयोजन में सहयोग करने का संतोष है। धर्म, भाषा और संस्कृति अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता का धागा सभी को एक साथ जोड़ता है। विविधता में एकता और आपसी सम्मान पर आधारित समाज के निर्माण में ऐसे उत्सवों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कश्मीर में शांति, भाईचारे और सह-अस्तित्व की भावना और मजबूत हो, यही हमारी अपेक्षा है।”
— पुनीत बालन, अध्यक्ष, पुनीत बालन ग्रुप