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सिंबायोसिस लॉ स्कूल ने पी.एन.भगवती अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता जीती

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पुणे. मानवाधिकार विषयक 13वीं न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता का समापन समारोह भारती विद्यापीठ न्यू लॉ कॉलेज (एरंडवणे) में संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में सिंबायोसिस लॉ स्कूल, पुणे की टीम ने विजेता का खिताब हासिल किया, जबकि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर उपविजेता रही। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जल भुयान, श्रीलंका के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर. एम. एस. राजकरुणा, दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा, केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन की गरिमामयी उपस्थिति में पुरस्कार वितरण संपन्न हुआ।

प्रतियोगिता कुलपति प्रो. डॉ. शिवाजीराव कदम, सचिव एवं प्रो-वाइस चांसलर डॉ. विश्वजीत कदम, कुलपति प्रो. डॉ. विवेक सावजी, कुलसचिव जी. जयकुमार, अधिष्ठाता एवं प्राचार्य डॉ. उज्वला बेंडाले, उप-प्राचार्य डॉ. ज्योति धर्मा, समन्वयक डॉ. विद्या ढेरे और फैकल्टी समन्वयक प्रो. डॉ. शिवांगी सिन्हा के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। समापन समारोह 22 मार्च 2025 को एरंडवणे कैंपस में हुआ।

यह प्रतियोगिता तीन दिनों तक चली, जिसमें 32 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में मानवाधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा और कानूनी कौशल की प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस प्रतियोगिता में सिंबायोसिस लॉ स्कूल, पुणे प्रथम स्थान पर रहा, जबकि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, नागपुर उपविजेता रहा। सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय टीम का पुरस्कार नेशनल लॉ कॉलेज, नेपाल को प्रदान किया गया। आईएलएस लॉ कॉलेज को सर्वश्रेष्ठ स्मरणिका पुरस्कार मिला, जबकि नेशनल लॉ कॉलेज, नेपाल की निशा अधिकारी को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता का पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा, लॉयड लॉ कॉलेज के आयुष कुमार झा को सर्वश्रेष्ठ वक्ता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने अपने भाषणों में मानवाधिकारों की सुरक्षा और कानून के छात्रों की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ी।

कड़े सेमीफाइनल मुकाबलों के बाद दो टीमें फाइनल में पहुंचीं, जहां उन्होंने निर्णायक मंडल के समक्ष प्रभावी ढंग से अपने तर्क प्रस्तुत किए। फाइनल मुकाबले के न्यायमंडल में न्यायमूर्ति आर. एम. एस. राजकरुणा, न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा, न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति सुधीर कुमार जैन शामिल थे। इस अनुभवी न्यायमंडल ने प्रतियोगियों के प्रदर्शन का निष्पक्ष और गहन मूल्यांकन किया।

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