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मानवता के लिए सनातनियों का सजग रहना समय की मांग है: पवन सराफ

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पुणे.सनातन धर्म को लेकर आज तरह-तरह की बातें की जाती हैं। कुछ बातें तो बिना सिर पैर की भी होती हैं। वास्तव में सनातन धर्म ही शास्वत है। सनातन धर्म मानवीय मूल्यों को सहेजने, मानवता की रक्षा करने की शिक्षा देता है। जो सनातन का विरोधी है वह वास्तव में सनातन के साथ-साथ मानवता का भी विरोधी है। इसलिए जो मानवता के विरोधी हैं उनका भारत में ही नहीं समूची दुनिया में विरोध होना चाहिए और हम ऐसी ताकतों का पुरजोर शब्दों में विरोध करते हैं। मानवता के लिए सनातनियों का सजग रहना समय की मांग है। यह स्पष्ट मत प्रखर सनातनी प्रसिद्ध समाजसेवी अग्रभूषण, समाजभूषण पवनजी सराफ ने यहां व्यक्त किया।

चौरासी वर्षीय बुजुर्ग प्रबुद्ध लेखक डा. शिवशंकर शर्मा ‘ढिमोले’ द्वारा सनातनियों-हिंदुओं को अपने धर्म, संस्कार और राष्ट्रभक्ति के प्रति जगाने औैर उनकी आत्मा को अपनी लेखनी के माध्यम से झकझोरने के लिए ‘चौरासी की आंखें’ नामक एक पुस्तक रूपी कृति की रचना की गई है। ‘चौरासी की आंखें’ पुस्तक का विमोचन श्री सराफ व अन्य अतिथियों के हाथों यहां पुणे कैंप में समारोह पूर्वक संपन्न हुआ। इसी अवसर पर समाजसेवी पवन सराफ मुख्य अतिथि पद से बोल रहे थे। इस समय मंच पर अग्रवाल समाज फेडरेशन के उपाध्यक्ष धर्मानुरागी विनोद शिवनारायण बंसल, भाजपा के मा. नगरसेवक प्रबीण चोरबेले, उत्तर भारतीय विकास परिषद के संस्थापक अध्यक्ष सतीशचंद्र दुबे, प्रसिद्ध लेखक रणजीतसिंह अरोरा ‘अर्श’, समाजसेवी एसएस अहलूवालिया, श्रीमती नीता चंद्रशेखर अग्रवाल और ‘चौरासी की आंखें’ पुस्तक के लेखक शिवशंकर शर्मा ढिमोले तथा पत्रकार लवकुश तिवारी मौजूद थे।

अपने संबोधन में प्रबीण जी चोरबेले ने पुस्तक की विषयवस्तु की प्रशंसा की और पुस्तक को परिवार के सभी आयुवर्ग के लोगों के लिए पठनीय बताया। उन्होंने कहा कि निश्चित ही ‘चौरासी की आंखें’ समाज के लोगों को धर्मपरायण बनाने और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देने में सफल होगी।

इसी संबंध में विनोद बंसल जी ने ‘चौरासी की आंखें’ को उत्कृष्ट कृति बताया और कहा कि यह और भी अच्छी बात है कि इस पुस्तक का कोई मूल्य नहीं रखा गया है। यह निःशुल्क है। इससे स्पष्ट है लेखक और प्रकाशक ने ‘चौरासी की आंखें’ को धर्महित, राष्ट्रहित मंे ही प्रकाशित किया है। पुस्तक को सभी को पढ़ना चाहिए। प्रसिद्ध लेखक रणजीतसिंह अरोरा ने कहा कि ऐसी पुस्तकों की रचना यदा कदा ही होती है। वास्तव में महान कार्य डा. शर्मा ने किया है।

डा. शिवशंकर शर्मा ‘ढिमोले’ ने सभी अतिथियों और सभी वक्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे आजीवन धर्म, समाज और राष्ट्र के प्रति सजग रहकर चिंतन मनन करते रहेंगे। उन्होंने सभी लोगों से पूरे मनोयोग से धर्म और राष्ट्रनिर्माण में तत्पर होने का आग्रह करते हुए कहा कि मेरे पुस्तक लेखन की मूल भावना भी यही है।

समारोह में प्रखर हिदुवादी समाजसेवी रामभक्त विनोद जी मित्तल, भाजपा युवा मोर्चा के एड. सूरज दुबे, बजरंग दल के शहर जिला संयोजक आकाश दुबे, समाजसेवी जय किशन गोयल, सरस्वती गोयल, लायन रानी अहलूवालिया, भाजपा नेता मनोज टी मिश्रा, इस्कान संस्था से जुड़े ओमप्रकाश तिवारी, नवमहाराष्ट्र विकास मंच की बिंदू तिवारी, नागपुर से आई डा. शर्मा की जेष्ठ सुपुत्री शोभना जी , जबलपुर से आई छोटी पुत्री स्वाति चौहान, चिरंजीव आशीष शर्मा जी, पुत्रवधू हरमीत कौर शर्मा पोती और पोता – श्रीम एवं ओशम शर्मा सहित बड़ी संख्या में परिजन व शुभचिंतक मौजूद थे।

पुस्तक में डा शर्मा के सहयोगी रहे संजय गायकवाड़, विशाल अग्रवाल, अर्चना गड़करी, पूजा पंडित, पूनम सिंह आदि का अतिथियों के हाथों विशेष सम्मान किया गया।

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