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अमृत जैसे फल आए, भीमा तुम्हारे जन्म से…”संविधानवादी बनें” – डॉ. हुलगेश चलवादी का आह्वान

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पुणे. विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के संविधान निर्माता, बौद्धसत्व, तर्कशास्त्री, क्रांति सूर्य, विश्वरत्न, युगपुरुष और महान विधिवेत्ता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 134वीं जयंती के अवसर पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

पार्टी के प्रदेश महासचिव, पश्चिम महाराष्ट्र ज़ोन के प्रमुख प्रभारी और पूर्व नगरसेवक डॉ. हुलगेश चलवादी के नेतृत्व में पुणे रेलवे स्टेशन परिसर स्थित बाबासाहेब के पुतले को ढोल-ताशों और जय भीम के नारों के साथ माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। ‘भीमोत्सव’ के कारण पूरा वातावरण ‘भीममय’ हो गया था।

इस अवसर पर बसपा पुणे जिला अध्यक्ष अशोक दादा गायकवाड़, प्रवीण वाकोड़े, पी.आर. गायकवाड़, महेश जगताप (महाराज), शीतलताई गायकवाड़, रविंद्र चांदने, परशुराम आरुणे, प्रभाकर खरात, राम डावकर, दीपक भालेराव, शफी भाई, अनिल त्रिपाठी, मुकेश शेलार, भोलाराम जैस्वार, नितेश गायसमुद्रे, बाळासाहेब हातागळे, सिद्धार्थ कांबळे, आकाश डावकर, क्रांती कुमार दणाणे, सुधीर कांबळे, मनोज कसबे, संतोष भोसले, शिवाजी वाघमारे, सी.एन. शिंदे, संतोष शिंदे, संतोष सोनोने, अनिल सरोदे, रमेश गायकवाड़, सुजित जैस्वार, संदीप कांबळे, अशोक जैस्वार, नवीन वानखेडे, गंगावणे साहेब और अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता व शुभचिंतक उपस्थित थे।

जनसमूह को संबोधित करते हुए डॉ. चलवादी ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब के विचार समाज को दिशा देने वाले थे, हैं और रहेंगे। उनके समतामूलक विचारों ने सैकड़ों वंचित परिवारों का उद्धार किया है। बसपा, बाबासाहेब द्वारा दिए गए सामाजिक न्याय, बंधुता और समता के सिद्धांतों को आगे बढ़ा रही है।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डॉ. बाबासाहेब की त्रिसूत्री “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी बहुजन समाज पार्टी के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्हीं के विचारों को मान्यवर कांशीराम जी और बहन मायावती जी ने व्यवहार में लाकर बहुजन समाज को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया है।अब यह जिम्मेदारी नई पीढ़ी पर है कि वह शोषित, पीड़ित, वंचित और उपेक्षित समाज को मुख्यधारा में लाए। यही बसपा का मुख्य उद्देश्य है।

 

डॉ. चलवादी ने बताया कि बहन मायावती जी ने देश के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और उपेक्षितों से बीएसपी के साथ आकर आंबेडकरवादी बनने का आह्वान किया है। उन्होंने ‘मेरा भारत महान’ और ‘विकसित भारत’ का सपना साकार करने के लिए सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से जातिवाद और संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ छोड़कर ‘संविधानवादी’ बनने की अपील की है। डॉ. चलवादी ने आगे कहा कि संविधानवादी दृष्टिकोण अपनाकर ही व्यापक जनहित और देशहित सुनिश्चित किया जा सकता है। जातिवाद से मुक्त होकर ही समतामूलक भारत का निर्माण संभव है।

 

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