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बाबासाहब ज्ञान के, तो रमाई त्याग की प्रतीक -हर्षवर्धन सपकाळ

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पुणे. “भारतीय संविधान के शिल्पकार, अर्थशास्त्री और विधिवेत्ता डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जहाँ ज्ञान के प्रतीक हैं, वहीं रमाई आंबेडकर त्याग की प्रतीक हैं। रमाई के त्याग और साथ के कारण ही बाबासाहब को संविधान निर्माण समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर मिला। बाबासाहब का संविधान और रमाई का त्याग, इन दोनों से प्रेरणा लेकर महाराष्ट्र में फिर एक बार संविधान की भावना के अनुरूप सरकार लाने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए,” ऐसा प्रतिपादन कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने किया।

पुणे स्टेशन स्थित महामाता रमामाई भीमराव आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक को हर्षवर्धन सपकाळ ने हाल ही में सदिच्छा भेंट दी। इस अवसर पर पुणे महानगरपालिका के पूर्व विपक्षी नेता एड. अविनाश सालवे के हाथों हर्षवर्धन सपकाळ का सम्मान किया गया। उन्हें भारतीय संविधान की प्रति, सम्मानचिह्न और शॉल देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पुणे शहर जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अरविंद शिंदे, महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एड. अभय छाजेड़, पूर्व मंत्री रमेश बागवे, पूर्व नगरसेविका लता राजगुरु, सुजित यादव और मुख्य समन्वयक विठ्ठल गायकवाड आदि उपस्थित थे।

एड. अविनाश सालवे ने कहा, “बाबासाहेब का कार्य सम्पूर्ण विश्व के लिए एक आदर्श है। उन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार दिलाया। इस यात्रा में माता रमाई का त्याग और साथ अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। हमें रमाई के योगदान, उनके त्याग और समर्पण को समझना चाहिए।”

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