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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने लिया बड़ा एक्शन

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पुणे. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की बैठक में कई बड़े निर्णय लिए गए। सबसे अहम फैसला यह रहा कि भारत ने 1960 के सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है।

इसके अलावा, पाकिस्तानी नागरिकों के भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, साथ ही भारत में स्थित पाकिस्तानी दूतावास के कुछ अधिकारियों को वापस भेजने का आदेश भी दिया गया है।

 

सिंधु जल संधि क्या है?

1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच कराची में विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह अंतरराष्ट्रीय संधि हुई थी। इस पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।

 

इस संधि के अंतर्गत छह प्रमुख नदियों को दो भागों में बांटा गया:

 

पूर्व की नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलज): इनका पानी भारत को मिला।

 

पश्चिम की नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब): इनका अधिकांश जल पाकिस्तान को मिला, जबकि भारत को सीमित उपयोग (जैसे सिंचाई, घरेलू उपयोग, और जलविद्युत) की अनुमति दी गई।

 

 

भारत का कितना हक?

भारत को पूर्व की नदियों के 100% पानी पर अधिकार है, जबकि पश्चिम की नदियों का करीब 10-20% ही भारत उपयोग कर सकता है, वो भी “रन-ऑफ-द-रिवर” पद्धति से यानी जलप्रवाह को रोके बिना।

 

इस करार की निगरानी कौन करता है?

इसके लिए एक स्थायी सिंधु आयोग बना है जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों से एक-एक आयुक्त होते हैं। यह आयोग जलविवादों का समाधान करता है और दोनों देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करता है।

 

पाकिस्तान को झटका क्यों?

भारत यदि इस संधि को स्थगित करता है, तो पाकिस्तान की पश्चिम की नदियों से मिलने वाली जल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इससे वहां की कृषि, जलविद्युत और पेयजल व्यवस्था को झटका लग सकता है।

 

विवाद क्यों होता रहा?

भारत द्वारा बनाए गए जलविद्युत परियोजनाओं जैसे किशनगंगा और बगलीहार पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि इससे पानी की आपूर्ति बाधित होती है।

अब तक यह संधि 1965, 1971 और 1999 के युद्धों के बावजूद बनी रही, लेकिन अब आतंकवाद के समर्थन और सीमापार हमलों के चलते भारत ने इसे स्थगित करने का निर्णय लिया है।

शशिकांत पाटोळे

विश्वस्त : द्वारकामाई सोशल फाउंडेशन, बोपोडी पुणे.

 

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