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पुणे मनपा आयुक्त से ढोल-ताशा पथकों के लिए सुरक्षित जगह की मांग

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मुठा नदी पात्र में समयबद्ध व्यवस्था की अपील, पिछले वर्ष बाढ़ में ढोल बहने से हुआ था नुकसान

पुणे. महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में गणेशोत्सव की धूम संपूर्ण देश में प्रसिद्ध है। इस उत्सव की भव्यता में “ढोल-ताशा-लेझीम पथक” प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जिनमें हजारों तरुण-तरुणियां, विद्यार्थी और सांस्कृतिक सेवक भाग लेते हैं। इन पथकों के नियमित प्रेक्टिस एवं वाद्ययंत्रों की सुरक्षा के लिए पुणे महानगरपालिका से विशेष सुविधा की मांग कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल शंकरराव तिवारी ने की है।

इस संदर्भ में गोपाल शंकरराव तिवारी द्वारा महापालिका आयुक्त  नवलकिशोर राम को 3 जुलाई को एक निवेदन दिया है। इसमें कहा गया है कि पुणे की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में गणेशोत्सव और उससे जुड़े पथकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ढोल-ताशा पथकों की सराव प्रक्रिया हर वर्ष ढाई से तीन महीने तक चलती है, परंतु उनके पास अभ्यास के लिए सुरक्षित व अधिकृत स्थान नहीं होता, जिससे उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

निवेदन में सुझाव दिया गया है कि मनपा प्रशासन को मुठा नदी के विस्तृत पात्र में नियोजित समय, दूरी व शुल्क आधारित व्यवस्था के तहत पथकों को सराव के लिए अधिकृत स्थान उपलब्ध कराना चाहिए। इससे वे बिजली कनेक्शन ले सकेंगे, मंडप लगाकर वाद्ययंत्रों को सुरक्षित रख सकेंगे और ढोल जैसे महंगे वाद्ययंत्रों को बारिश व बाढ़ से बचाया जा सकेगा। यह उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष कई ढोल मुठा नदी में बह गए थे, जिससे पथकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

पथकों को समय और नियमों के तहत वादन की अनुमति देने से नजदीकी परिसर के वरिष्ठ नागरिकों और विद्यार्थियों को भी ध्वनि प्रदूषण से राहत मिलेगी। साथ ही, अगर पथकों का अनावश्यक खर्च बचेगा तो वे वादकों के लिए कल्याणकारी योजनाएं भी चला सकेंगे।

इस मांग को लेकर प्रशासन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई है, ताकि पुणे के गणेशोत्सव की गरिमा बनी रहे और सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे।

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