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जैन समाज को अब एक आक्रमक सशक्त, संगठित और प्रभावी संगठन की आवश्यकता : संदीपदादा भंडारी

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पुणे : जैन धर्म में संगठनों और संस्थाओं की कोई कमी नहीं है और सभी संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर सराहनीय कार्य कर रही हैं, लेकिन वर्तमान समय में जैन समाज पर हो रहे लगातार हमलों, साधु-संतों की सुरक्षा की चिंता, तीर्थ स्थलों के संरक्षण तथा संस्कृति के प्रति हो रहे आघातों को देखते हुए अब एक आक्रमक सशक्त, संगठित और प्रभावी संगठन की आवश्यकता महसूस हो रही है.

इसी उद्देश्य को लेकर राष्ट्रीय जैन सेना की स्थापना राष्ट्रप्रमुख ललित गांधी के नेतृत्व में की गई है। समाज की रक्षा हेतु “जैसे को तैसा” उत्तर देने के संकल्प के साथ यह संगठन जैन समाज के लिए एक रक्षण कवच बनकर कार्य कर रहा है।

इसी कड़ी में कोंढवा शाखा का उद्घाटन समारोह शांतीनगर, कोंढवा में क्रांतिकारी संत विराग सागर जी महाराज के पावन हस्तों द्वारा संपन्न हुआ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय उपप्रमुख संदीपदादा भंडारी ने अपने उद्बोधन में कहा “आज जैन समाज को केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आत्मरक्षा के स्तर पर एक सशक्त संगठन की आवश्यकता है। राष्ट्रीय जैन सेना, साधु-संतों, तीर्थों और श्रावकों की सुरक्षा के लिए कृतसंकल्पित है।”

इस समारोह में शाखा प्रमुख – राजेश सालेचा, उपप्रमुख – मिथुन पालरेचा, सहप्रमुख – आशिष कटारिया, संजय चोपड़ा, विपुल राय गांधी, आदि पदाधिकारीयोकी नियुक्तियाँ भी की गईं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रीतम जैन, मयूर सरनोत, अभिजीत शहा, श्रीमल बेदमुथा, प्रमोद छाजेड़ और विनोद सोलंकी का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम में स्थानीय जैन समाज के कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। सभी ने राष्ट्रीय जैन सेना के उद्देश्यों का स्वागत करते हुए समाजहित में संगठन के साथ तन-मन-धन से जुड़ने का संकल्प लिया।

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