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पुणे मनपा के स्वास्थ्य विभाग में ‘गोलमाल’?

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पुणे। पुणे महानगरपालिका के स्वास्थ्य विभाग में अध्ययन अवकाश (Study Leave) के मामले में बड़े घोटाले का आरोप सामने आया है। वरिष्ठ नागरिक रमेश खामकर ने डॉ. प्रल्हाद पाटील को अध्ययन रजा (अवकाश) देने की प्रक्रिया को नियमबाह्य बताते हुए प्रशासन की कार्यपद्धती पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

रमेश खामकर ने मनपा आयुक्त को भेजे अपने निवेदन में पूछा है कि, “जब संबंधित फाइल पर स्वास्थ्य प्रमुख की स्वाक्षरी ही नहीं थी, तो वह आयुक्त के पास मंजूरी के लिए कैसे भेजी गई?” उन्होंने प्रस्तुत दस्तावेज़ों में यह भी दर्शाया है कि कई पत्रों पर स्वास्थ्य प्रमुख की मंजूरी ही नहीं थी, और पूरी प्रक्रिया ‘गुपचुप’ तरीके से पूरी की गई।

स्वास्थ्य प्रमुख की भूमिका पर सवाल

खामकर ने यह सीधा सवाल उठाया है कि, “क्या पुणे मनपा में स्वास्थ्य प्रमुख का पद वास्तव में अस्तित्व में है?” उनका कहना है कि डॉ. पाटील की छुट्टी के दौरान संबंधित फाइल बिना स्वास्थ्य प्रमुख की स्वीकृति के कैसे आगे बढ़ाई गई, यह गहरी शंका पैदा करता है।

उपआयुक्त की बैठक में उठे मुद्दों को किया गया नजरअंदाज

उपआयुक्त सपकाळ की अध्यक्षता में हुई बैठक में रमेश खामकर ने इस मुद्दे को विस्तार से उठाया था। लेकिन, बैठक के कार्यवृत्त (मिनट्स) में उनका कोई उल्लेख नहीं किया गया। इतना ही नहीं, उपआयुक्त की स्वाक्षरी भी फाइल पर नहीं ली गई, जो कि एक सुनियोजित लापरवाही की ओर संकेत करता है।

अतिरिक्त आयुक्त के आदेशों की भी अनदेखी

खामकर ने अतिरिक्त आयुक्त (जोनल) को भी निवेदन सौंपा था, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बिंदुवार स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस आदेश की भी खुलकर अनदेखी की। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि खुद के आदेशों की अवहेलना होते देख भी अतिरिक्त आयुक्त ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

“सब कुछ गोलमाल है भाई!”

खामकर ने इस पूरे मामले को ‘गोलमाल’ करार देते हुए कहा कि, “डॉ. पाटील के अध्ययन अवकाश के मामले में भारी गड़बड़ी है। वरिष्ठ अधिकारी भी बिना जांच किए आंख मूंदकर दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग में कुछ अधिकारियों की मनमानी चल रही है और कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।” उन्होंने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा – “सब कुछ गोलमाल है भाई!”

इस मामले ने पुणे मनपा के स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शकता और जवाबदेही की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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