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पुणे में आध्यात्मिक परंपरा, राष्ट्रीय जागरूकता और सामाजिक सुधारों का संगम – अमृता फडणवीस

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पुणे। “पुणे में आध्यात्मिक परंपरा, राष्ट्रीय जागरूकता और सामाजिक सुधारों का सुंदर संगम है। यहां आकर हमेशा आत्मीयता का अनुभव होता है,” ऐसा भावपूर्ण वक्तव्य सामाजिक कार्यकर्ता अमृता फडणवीस ने किया। वे लक्ष्मीबाई दगडूशेठ हलवाई दत्त मंदिर की 128वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित “लक्ष्मीबाई स्मृति पुरस्कार” वितरण कार्यक्रम में बोल रही थीं।

यह आयोजन छत्रपती शिवाजीनगर स्थित मॉडर्न कॉलेज के लता मंगेशकर सभागृह में संपन्न हुआ। अमृता फडणवीस के हस्ते ‘महिला सेवा मंडळ’, प्रसिद्ध ओबेसिटी विशेषज्ञ डॉ. जयश्री तोडकर और प्राचीन मूर्तियों के वज्रलेपन की कलाकार स्वाती ओतारी को स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार में दत्तमहाराज की प्रतिकृति, ₹25,000 की सम्मान राशि और महावस्त्र शामिल थे।

इस अवसर पर राज्य युवा नीति समिति की सदस्या डॉ. निवेदिता एकबोटे, ट्रस्ट अध्यक्ष अ‍ॅड. शिवराज कदम जहागिरदार, कार्यकारी विश्वस्त अ‍ॅड. रजनी उकरंडे, कोषाध्यक्ष युवराज गाडवे, श्रीमंत दगडूशेठ गणपती ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील रासने सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

अमृता फडणवीस ने कहा कि लोकमान्य तिलक के सार्वजनिक गणेशोत्सव आंदोलन के पीछे लक्ष्मीबाई और दगडूशेठ हलवाई का भी महत्त्वपूर्ण योगदान था। लक्ष्मीबाई ने समाज में शांति से परिवर्तन लाया। आज के तीनों पुरस्कार विजेताओं ने भी उन्हीं मूल्यों को जीवंत रखा है।

पुरस्कृत ‘महिला सेवा मंडल’ की पुष्पा हेगडे ने बताया कि संस्था को 84 वर्षों में यह पहला बड़ा पुरस्कार मिला है। डॉ. जयश्री तोडकर ने मोटापे और मधुमेह के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई, जबकि स्वाती ओतारी ने अपनी सेवा को ईश्वर-अर्पण बताया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष एड. शिवराज कदम जहागिरदार ने बताया कि पुणे का यह मंदिर 128 वर्षों से श्रद्धा और सेवा का केंद्र रहा है और लक्ष्मीबाई के योगदान की स्मृति बनाए रखने हेतु यह पुरस्कार शुरू किए गए हैं।

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