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नवोन्मेषी शिक्षा ही राष्ट्र की प्रगति का आधार _डॉ. अभय करंदीकर

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पुणे: इक्कीसवीं सदी में शिक्षा की परिभाषा पूरी तरह से बदल गई है। अब शिक्षा केवल विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं या डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्र की प्रगति का एक सशक्त साधन बन गई है। इसलिए, विकसित भारत@2047 के सपने को साकार करने के लिए विज्ञान, तकनीक और अभियांत्रिकी सहित अन्य क्षेत्रों की समस्याओं को सुलझाने में सक्षम शिक्षा विद्यार्थियों को दी जानी चाहिए। भारत एक साहसी सोच के बल पर बना है, और विद्यार्थियों को भी अपने क्षेत्र की चुनौतियों को सुलझाने के लिए साहस दिखाना चाहिए, ऐसा विचार भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव प्रो. डॉ. अभय करंदीकर ने व्यक्त किया।

वे एमआईटी आर्ट, डिजाइन और टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय, विश्वराजबाग, पुणे में आयोजित दसवें ‘विद्यारंभ-25’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।

इस अवसर पर मंच पर माईर्स एमआईटी एजुकेशन ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड, एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के कार्याध्यक्ष प्रो. डॉ. मंगेश कराड, कुलपति प्रो. डॉ. राजेश एस., कार्यकारी संचालक प्रो. डॉ. सुनीता कराड, डॉ. विनायक घैसास, प्र-कुलपति डॉ. रामचंद्र पुजारी, डॉ. मोहित दुबे समेत सभी विभागों के निदेशकगण उपस्थित थे।

डॉ. करंदीकर ने आगे कहा, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कहा करते थे कि विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि ऐसे सपनों से जुड़ी असफलता भी ऐतिहासिक बन जाती है। साथ ही, एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय के 150+ एकड़ में फैले अत्याधुनिक परिसर में ‘क्रेया’, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर जैसे कई नवाचारी उपक्रम चल रहे हैं, और वर्तमान में 75+ शोध परियोजनाओं पर काम हो रहा है, यह देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई।

विश्वशांति प्रार्थना से आरंभ हुआ यह कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रो. डॉ. राजेश एस. ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ. मोहित दुबे ने किया। मंच संचालन प्रो. श्रद्धा वाघटकर एवं डॉ. अशोक घुगे ने किया।

विशेष टिप्पणी:

“पूरे विश्व की निगाहें भारत पर” – प्रो. डॉ. विश्वनाथ कराड

अध्यक्षीय भाषण में प्रो. डॉ. विश्वनाथ कराड ने विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा, छात्र जीवन में जब मैं पशुओं को चराता था, तभी मैंने शहर जाकर बड़ा अधिकारी बनने का सपना देखा था। इसलिए विद्यार्थियों को भी बड़े सपने देखने चाहिए, क्योंकि वे एक दिन अवश्य पूरे होते हैं। अमेरिका यात्रा के दौरान मुझे यह अनुभव हुआ कि आज पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी हैं, क्योंकि इस अशांत, युद्धग्रस्त, संघर्षों से घिरे विश्व को सुख, शांति और संतोष का मार्ग दिखाने की शक्ति केवल भारतीय संस्कृति में है।

 

कोट _

“एआई जैसे तकनीकों ने आज हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है। शिक्षा क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। विद्यार्थियों को इन संसाधनों का रचनात्मक उपयोग कर बदलती दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहिए। पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर भी ज़ोर देना आवश्यक है। अब यह विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी बनती है कि वे ऐसी शिक्षा प्रदान करें जो रोजगारोन्मुखी कौशल और नवउद्यमिता को बढ़ावा दे। यही उद्देश्य एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय बखूबी निभा रहा है, जिसके चलते इस वर्ष 5000 से अधिक छात्रों ने यहां प्रवेश लेकर एमआईटी ब्रांड पर दोबारा भरोसा जताया है।”

— प्रो. डॉ. मंगेश कराड,कार्याध्यक्ष,

एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय, लोणी-कालभोर, पुणे

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