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आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक – डॉ. अशोक वुईके

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पुणे। आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए सभी विभागों को मिलकर कार्य करना होगा, ताकि इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। यह बात महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुईके ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आयोजित “आदि कर्मयोगी” विभागीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में कही।

उन्होंने कहा कि कई योजनाएं अब तक आदिवासी गांवों तक नहीं पहुंची हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जनसहभाग जरूरी है और अधिकारियों को गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलानी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के तहत आदिवासी विकास विभाग भी गांव-गांव योजनाएं पहुंचाने का काम करेगा।

यह 7 दिवसीय कार्यशाला यशदा, पुणे में आयोजित है, जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और केरल के अधिकारियों सहित विभिन्न राज्यों के सचिव व केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं। इस अभियान में 17 विभागों की 25 योजनाएं आदिवासी समुदाय तक पहुंचाई जाएंगी और देशभर में 2 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को “आदि कर्मयोगी” के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

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