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२५ साल की महिला ने दो दुर्लभ बीमारियों को दी मात

ट्यूमर और ट्यूबरकुलोसिस प्रसव के महीनों बाद पता चला

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मेसेंटेरिक ट्यूमर बहुत ही कम पाया जाता है। यह बेहद दुर्लभ है, एक लाख में सिर्फ २-४ लोगों में। पेट का टीबी भी दुर्लभ है। इन दोनों बीमारियों का एक साथ २५ साल की महिला में होना पहले कभी नहीं देखा गया।

पुणे –  पेट में मेसेंटेरिक ट्यूमर और टीबी होते हुए २५ साल की एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया हैं। डिलीवरी तक महिला को इस बारे मे पता नही था। गर्भावस्था के दौरान यह ट्यूमर धीरे-धीरे बढने लगा। ऐसी स्थिती में पुणे स्थित खराडी अस्पताल में गौरी जगदाले और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक इस महिला का इलाज किया हैं।
प्रसूति के कुछ ही महीनों बाद मरीज को एक साथ दो जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। खड़ाड़ी में रहने वाली २५  वर्षीय महिला के गर्भाशय में १० से १२ सेंटीमीटर आकार का एक बड़ा फाइब्रॉइड पाया गया था, जिस पर पूरे नौ महीनों तक निगरानी रखी गई थी और उसकी सिज़ेरियन डिलीवरी के दौरान उसे सुरक्षित रूप से निकाल दिया गया था। अक्टूबर २०२४ में महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। प्रसूति के मात्र 5 महीने बाद, यानी अप्रैल २०२५ में, उसके शरीर में कुछ असामान्य बदलाव दिखाई देने लगे। उसे अंदरूनी भारीपन महसूस होने लगा और साथ ही दर्द भी होने लगा, जिससे रोज़मर्रा के काम करना मुश्किल हो गया। हाल ही में प्रसूति होने के कारण उसने इसे सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन दिन-ब-दिन दर्द बढ़ता गया और वह घबरा गई। प्रसूति के सात महीने बाद वह इस समस्या को लेकर डॉक्टर के पास पहुँची। वैद्यकीय जांच के बाद डॉक्टरों को उसके पेट में 18 सेंटीमीटर आकार और ५२७ ग्राम वज़न की एक बड़ी गांठ पाई गई। गांठ इतनी बड़ी थी कि उसका पेट फिर से पाँच महीने की गर्भावस्था जैसा दिखाई देने लगा। फाइब्रॉइड इतिहास को देखते हुए शुरुआत में एक बड़े फाइब्रॉइड का संदेह हुआ। शुरू में डॉक्टरों ने सोचा कि यह फाइब्रॉइड है, लेकिन सर्जरी में पता चला कि ट्यूमर गर्भाशय से नहीं, बल्कि मेसेंटरी (आंतों को जोड़ने वाली झिल्ली) से था। साथ ही उसे पेट का टीबी भी था।
*पुणे स्थित खराडी मदरहुड अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्रीरोग तज्ज्ञ डॉ. गौरी जगदाले ने कहॉं,* मरीज युवा और स्वस्थ थी और उसकी सिज़ेरियन डिलीवरी के दौरान उसके फाइब्रॉइड्स की सर्जरी की गई थी। कुछ महीनों बाद जब फिर से एक बड़ी गांठ पाई गई, तो शुरुआत में हमें फाइब्रॉइड का ही पता चला। हालाँकि, सर्जरी के दौरान जब यह स्पष्ट हुआ कि ट्यूमर गर्भाशय से नहीं, बल्कि मेसेंटरी से उत्पन्न हो रहा है, तब सही निदान संभव हो पाया। इस मामले को असामान्य बनाने वाली दूसरी महत्वपूर्ण बात पेट का क्षय रोग (एब्डॉमिनल ट्यूबरकुलोसिस) थी। ये दोनों ही स्थितियाँ दुर्लभ हैं और २५ वर्षीय महिला में ऐसी दुर्लभ समस्याओं का पाया जाना निश्चित रूप से चिंताजनक है।
*डॉ. गौरी आगे कहॉं कि,*  यदि इस गांठ को समय पर नहीं निकाला गया होता, तो यह आंतों और प्रमुख रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालकर गंभीर रुकावटें पैदा कर सकती थी, जिससे भारी रक्तस्राव या संक्रमण का खतरा हो सकता था। समय रहते की गई कार्रवाई से इन सभी जटिलताओं को टालना संभव हो पाया। आज वह दर्द-मुक्त जीवन जी रही है और अपने बच्चे की सही तरीके से देखभाल कर पा रही है।
डॉक्टरों की जांच में जो सामने आया, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। यह 18 सेंटीमीटर का विशाल पेट का ट्यूमर था, जिसका वजन 527 ग्राम था—इतना बड़ा कि उसका पेट फिर से लगभग पाँच महीने की गर्भावस्था जैसा दिखाई देने लगा। फाइब्रॉइड का पुराना इतिहास होने के कारण, मदरहुड हॉस्पिटल, खराड़ी की टीम को शुरुआत में एक और बड़े फाइब्रॉइड का ही संदेह हुआ। लेकिन उसके लक्षण और स्कैन किसी भी तरह से सामान्य नहीं लग रहे थे। उसकी कम उम्र, अच्छी सेहत और असामान्य स्थिति ने इस मामले को और भी रहस्यमय बना दिया। इन सभी चिकित्सकीय तथ्यों के पीछे एक युवा माँ थी, जो चुपचाप उलझन, असहजता और डर से जूझ रही थी—अपने शिशु की देखभाल करते हुए, बढ़ती चिंता को छिपाए हुए, जवाबों की उम्मीद और राहत की प्रार्थना के साथ।
*सलाहकार लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. सुशील देशमुख ने कहा,* “मेसेंटेरिक ट्यूमर बहुत ही दुर्लभ होते हैं, और यह ट्यूमर १८ सेंटिमीटर का था। इसे आसपास के अंगों को नुकसान पहुंचाए बिना हटाना बहुत जरूरी था। पैथोलॉजी रिपोर्ट में यह कम खतरनाक ट्यूमर पाया गया। इसके साथ पेट का टीबी भी था, जिससे मामला और जटिल हो गया, लेकिन हमने तुरंत एंटी-टीबी दवा शुरू कर दी ताकि महिला पूरी तरह ठीक हो सके।”
*मैत्री (नाम बदला गया) ने अपनी आभार व्यक्त करते हुए कहा,* “जब मुझे पता चला कि मेरे अंदर बड़ा ट्यूमर है, तो मैं डर गई थी। मुझे नहीं पता था कि मुझे ट्यूमर और टीबी दोनों होंगे। डॉक्टरों ने परिवार की तरह मेरा साथ दिया। आज मैं अपने बच्चे की देखभाल कर सकती हूं।”

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