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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) की भूमिका: वक्फ़ संपत्ति और अंबानी प्रकरण पर एक समीक्षा

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पुणे . ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) एक महत्वपूर्ण संगठन है, जो मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और सामाजिक मामलों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखता है। हाल ही में, बोर्ड ने वक्फ़ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) के खिलाफ पुरजोर विरोध किया है। यह विरोध जरूरी भी है क्योंकि इस विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जो मुस्लिम समाज के अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब अंबानी का आलीशान घर ‘एंटीलिया’ वक्फ़ की संपत्ति पर बनाया गया, तब AIMPLB ने इसी तरह की सक्रियता क्यों नहीं दिखाई? क्या यह संस्था केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही आवाज उठाती है?
एंटीलिया प्रकरण और AIMPLB की चुप्पी
मुंबई के पॉश इलाके में स्थित ‘एंटीलिया’ को दुनिया के सबसे महंगे घरों में से एक माना जाता है। यह भूमि कभी वक्फ़ संपत्ति थी, जिसे लेकर कानूनी विवाद भी चला। लेकिन इस पूरे मामले में AIMPLB ने मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। उल्टा, AIMPLB के कानूनी सलाहकार यूसुफ हातिम मुछाला ने अंबानी के पक्ष में वक्फ़ बोर्ड के खिलाफ पैरवी की।
यह स्थिति AIMPLB की निष्पक्षता और उद्देश्य पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जब मामला किसी प्रभावशाली उद्योगपति से जुड़ा हो, तो बोर्ड चुप्पी साध लेता है, लेकिन जब कोई विधेयक आता है, तब इसका विरोध करने के लिए पूरी ताकत झोंक देता है।
क्या AIMPLB की नीतियां संदिग्ध हैं?
AIMPLB को मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन इसकी कार्यशैली कई बार सवालों के घेरे में रही है। वक्फ़ संपत्तियों के मामले में इसका दोहरा रवैया साफ झलकता है।
•जब एक अरबपति उद्योगपति को वक्फ़ की संपत्ति मिलती है, तो AIMPLB कोई प्रतिरोध नहीं करता।
•लेकिन जब सरकार वक्फ़ बोर्ड के अधिकारों में बदलाव करती है, तो यह बोर्ड आंदोलन की राह पकड़ लेता है।
क्या यह संस्था अपने उद्देश्य से भटक चुकी है? क्या यह केवल राजनीतिक और कानूनी खेल का हिस्सा बन गई है?
मुस्लिम समाज को क्या करना चाहिए?
मुस्लिम समुदाय को चाहिए कि वह केवल AIMPLB के बयानों पर भरोसा न करे, बल्कि तथ्यों की गहराई से जांच करे। वक्फ़ संपत्तियां मुस्लिम समाज की धरोहर हैं, और इनका संरक्षण तभी संभव है जब निष्पक्ष और पारदर्शी नेतृत्व इसे संभाले।
AIMPLB को स्पष्ट करना होगा कि वह वास्तव में मुस्लिम समाज के हितों के लिए काम कर रहा है या फिर केवल कुछ खास वर्गों के लिए। यदि बोर्ड को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी है, तो उसे अपने कार्यों में पारदर्शिता लानी होगी और हर परिस्थिति में समान रूप से न्याय की लड़ाई लड़नी होगी।
AIMPLB का वर्तमान रवैया सवाल खड़े करता है। जब अंबानी का मामला आया, तब उसने चुप्पी साध ली, लेकिन अब वक्फ़ विधेयक के खिलाफ जोरदार विरोध कर रहा है। यह विरोध वाजिब हो सकता है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता तभी साबित होगी जब यह बोर्ड हर मुद्दे पर समान रूप से प्रतिक्रिया देगा।
मुस्लिम समाज को अब आंख मूंदकर किसी भी संस्था का समर्थन करने के बजाय, उसकी नीतियों और कार्यप्रणाली की गहराई से पड़ताल करनी चाहिए। केवल तभी सही नेतृत्व और न्यायसंगत नीतियां सामने आ सकेंगी।

अनवर शेख
(लेखक, बैंकर, अर्थशास्त्री, राजनीतिक विश्लेषक)

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